चंडीगढ़ , अक्टूबर 24 -- हरियाणा सरकार ने युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक में प्रदेश में पहली बार लागू होने वाली पीएम-सेतु योजना को मंजूरी दी गई।

इसके तहत अपग्रेड किए गए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने और उन्हें बेहतर वेतन वाली नौकरियों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। बैठक में कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर के लिए 320.44 करोड़ रुपये की परियोजना को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

हरियाणा में पीएम-सेतु योजना के तहत करीब 60 सरकारी आईटीआई को शामिल करते हुए 12 क्लस्टर विकसित करने की योजना है। इन पर अनुमानित 2,892 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें राज्य सरकार की हिस्सेदारी लगभग 954 करोड़ रुपये होगी। अब तक सात क्लस्टरों की पहचान की जा चुकी है।

कुरुक्षेत्र क्लस्टर की रणनीतिक निवेश योजना को राष्ट्रीय संचालन समिति से मंजूरी मिल चुकी है। कलायत क्लस्टर की योजना जनवरी 2027 के बाद तैयार की जाएगी। पलवल, सोनीपत और छारा क्लस्टरों के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने संबंधी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि पानीपत और रेवाड़ी के लिए दिसंबर में आरएफपी जारी की जाएगी।

केंद्र सरकार ने पीएम-सेतु योजना की घोषणा बजट 2024-25 में की थी, जबकि बजट 2025-26 में इसका विस्तार किया गया। योजना का राष्ट्रीय बजट 60,000 करोड़ रुपये निर्धारित है। इसमें केंद्र सरकार 30,000 करोड़, राज्य सरकारें 20,000 करोड़ और उद्योग जगत 10,000 करोड़ रुपये का योगदान देगा। एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक भी परिणाम आधारित ऋण व्यवस्था के माध्यम से केंद्र के हिस्से की 50 प्रतिशत तक सह-वित्तपोषण सहायता देंगे।

योजना के अंतर्गत देशभर के 1,000 सरकारी आईटीआई और पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।

योजना में एक हब आईटीआई के साथ लगभग चार स्पोक आईटीआई जोड़े जाएंगे। इन संस्थानों में आधुनिक मशीनरी, बेहतर बुनियादी ढांचे और डिजिटल लर्निंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। योजना के पहले घटक को हरियाणा का कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग लागू करेगा, जबकि दूसरे घटक का संचालन केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय करेगा।

योजना के प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन के लिए कंपनी अधिनियम की धारा-8 के तहत विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) बनाई जाएगी। इसमें एंकर इंडस्ट्री पार्टनर की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत होगी। केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 24.5-24.5 प्रतिशत रहेगी। कंपनी के बोर्ड में उद्योग, केंद्र और राज्य सरकार तथा आईटीआई के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसकी अध्यक्षता उद्योग प्रतिनिधि करेंगे।

कुरुक्षेत्र क्लस्टर की कुल लागत 320.44 करोड़ रुपये तय की गई है। इसमें केंद्र सरकार 160.22 करोड़ रुपये, राज्य सरकार 105.75 करोड़ रुपये और एंकर इंडस्ट्री पार्टनर 54.47 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी मेसर्स जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड को सौंपी गई है।

इस क्लस्टर में राजकीय आईटीआई कुरुक्षेत्र को हब संस्थान बनाया जाएगा। इसके साथ महिला आईटीआई कुरुक्षेत्र, आईटीआई कैथल, आईटीआई पेहोवा, आईटीआई पाबनावा, महिला आईटीआई अंबाला शहर और महिला आईटीआई कैथल को स्पोक संस्थानों के रूप में जोड़ा जाएगा।

परियोजना की कुल लागत में से 163.06 करोड़ रुपये बुनियादी ढांचे और प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण पर खर्च होंगे। इसमें 160.22 करोड़ रुपये केंद्र सरकार वहन करेगी। इसके अलावा 157.38 करोड़ रुपये संचालन संबंधी खर्च के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिसे राज्य सरकार और उद्योग भागीदार क्रमशः 65 और 35 प्रतिशत के अनुपात में वहन करेंगे।

कमेटी ने योजना के लिए अलग बजट हेड खोलने और वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुरुक्षेत्र क्लस्टर के लिए राज्य के हिस्से के 105.75 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को मंजूरी दी। चालू वित्त वर्ष में क्लस्टर के संचालन के लिए राज्य के हिस्से की 10 प्रतिशत अग्रिम राशि के रूप में 10.50 करोड़ रुपये जारी करने की अनुमति भी दी गई।

सरकार का मानना है कि इस योजना से आईटीआई में प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर होगी। आधुनिक तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण मिलने से युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी और उन्हें देश-विदेश की कंपनियों में बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

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