चंडीगढ़ , जुलाई 27 -- हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं के चार प्रमुख संगठनों के संयुक्त मंच ने बिजली क्षेत्र के कथित निजीकरण के विरोध में 11 से 13 अगस्त तक तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। संयुक्त मंच ने मुख्यमंत्री को नौ पृष्ठों का हड़ताल नोटिस सौंपते हुए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस, अलग कृषि डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग योजना को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
संयुक्त मंच के महासचिव रविंद्र घनघस ने सोमवार को बताया कि हड़ताल नोटिस पर हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन (एचपीईए) के महासचिव रविंद्र घनघस, एएचपीसी वर्कर यूनियन के महासचिव राजेंद्र राणा, एचएसईबी वर्कर यूनियन के महासचिव यशपाल देशवाल तथा एचपीसी एससी/एसटी एवं बीसी कर्मचारी यूनियन के विजेंद्र बराड़ के हस्ताक्षर हैं।
नोटिस में कहा गया है कि हरियाणा राज्य विद्युत बोर्ड के विघटन के समय दावा किया गया था कि निगमों के गठन से बिजली व्यवस्था में सुधार होगा और विभाग को लाभ मिलेगा लेकिन इसके विपरीत विभाग का घाटा लगातार बढ़ता गया। अब उसी तर्ज पर 'हरियाणा एग्रो डिस्कॉम' नाम से एक नई कंपनी बनाने की तैयारी की जा रही है।
संयुक्त मंच ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के समक्ष विचाराधीन गुरुग्राम और नूंह जिलों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) के समानांतर निजी कंपनी 'इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड' को बिजली वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया को तत्काल रोकने की मांग की है। इसके साथ ही स्मार्ट मीटर लगाने की योजना पर भी रोक लगाने की मांग की गई है।
बिजली कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि डीएचबीवीएन, यूएचबीवीएन, एचवीपीएनएल और एचपीजीसीएल के अधिकारी एवं कर्मचारी लंबे समय से अपनी जायज मांगों की अनदेखी से परेशान हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों और अभियंताओं की मांगों के समाधान के लिए सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है। इसी के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
संयुक्त मंच के नेता बलजीत बेनीवाल ने कहा कि कार्यभार में कई गुना वृद्धि होने के बावजूद एचवीपीएन और एचपीजीसीएल का पुनर्गठन अब तक लंबित है, जिससे कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
उधर, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के माध्यम से बिजली वितरण के "पिछले दरवाजे से निजीकरण" का विरोध किया है।
फेडरेशन के मीडिया सलाहकार वी.के. गुप्ता ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के डिस्कॉम द्वारा विकसित और संचालित वितरण नेटवर्क का उपयोग निजी कंपनियों को करने की अनुमति देना सरकारी बिजली कंपनियों को आर्थिक रूप से कमजोर करने वाला कदम होगा। उन्होंने कहा कि इससे सार्वजनिक वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा और बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
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