चंडीगढ़ , अक्टूबर 22 -- हरियाणा सरकार ने पराली जलाने, वाहनों के धुएं, सड़क की धूल और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अभियान तेज कर दिया है। फसल अवशेष प्रबंधन के तहत 9,000 मशीनें बांटने का लक्ष्य था, जबकि अब तक 13,200 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं। यह निर्धारित लक्ष्य से 47 प्रतिशत अधिक है। वहीं, जनवरी से अक्टूबर के मध्य तक निर्धारित आयु-सीमा पूरी कर चुके 19,067 वाहनों को जब्त किया गया है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा और हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदूषण नियंत्रण उपायों की समीक्षा की गई। आयोग ने प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में कमी के लिए सरकार के प्रयासों की सराहना की।

बैठक में बताया गया कि पराली जलाने के मामलों में 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। धान के अवशेषों के औद्योगिक उपयोग के लिए 27.10 लाख मीट्रिक टन पराली को लेकर समझौते किए गए हैं। बायोमास आधारित बिजली परियोजनाओं में 7.284 लाख मीट्रिक टन और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्रों में 1.053 लाख मीट्रिक टन पराली का उपयोग किया गया है।

प्रदूषण की निगरानी के लिए रेड जोन गांवों में पीएम2.5 के 79 सेंसर लगाए गए हैं। पहले चरण में 20 ड्रोन तैनात किए गए हैं और 30 अन्य लगाने की योजना है। वाहनों की निगरानी के लिए 600 एएनपीआर कैमरों की खरीद को 14.50 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

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