चंडीगढ़ , अप्रैल 23 -- हरियाणा में आगामी नगर निकाय चुनाव-2026 से पहले कानूनी शब्दावली को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधिवक्ता और अंबाला नगर निगम के निवासी हेमंत कुमार ने हरियाणा भारती जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों में "पार्षद शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए पार्टी नेतृत्व को ज्ञापन भेजा है।
ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य के मौजूदा नगरपालिका कानून हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 और हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में वार्डों से चुने गए प्रतिनिधियों के लिए "सदस्य (मेंबर)" शब्द का ही प्रावधान है। इन कानूनों और संबंधित चुनाव नियमों में कहीं भी "पार्षद" शब्द का उल्लेख नहीं मिलता।
अधिवक्ता कुमार के अनुसार, भले ही आम बोलचाल में "पार्षद" शब्द प्रचलित हो लेकिन कानूनी दृष्टि से हरियाणा में ऐसा कोई पद अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य के 87 शहरी निकायों 11 नगर निगम, 25 नगर परिषद और 51 नगरपालिका समितियों में निर्वाचित प्रतिनिधियों को "सदस्य" ही माना जाता है।
उन्होंने हाल ही में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित उपचुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि अधिसूचनाओं, नामांकन पत्रों, चुनाव प्रमाण-पत्रों और गजट नोटिफिकेशन में भी "सदस्य" शब्द का ही उपयोग किया गया है। शपथ ग्रहण प्रक्रिया में भी निर्वाचित प्रतिनिधियों को "सदस्य" के रूप में ही शपथ दिलाई जाती है।
ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया कि अन्य राज्यों में "पार्षद" शब्द कानूनी रूप से मान्य हो सकता है लेकिन हरियाणा में इसका प्रयोग कानून के अनुरूप नहीं है। अंत में भाजपा से अपील की गई है कि वह अपनी प्रेस विज्ञप्तियों में "वार्ड सदस्य प्रत्याशी" शब्द का प्रयोग करे।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित