चंडीगढ़ , अक्टूबर 12 -- हरियाणा सरकार ने जनगणना-2027 के तहत राज्य में शत-प्रतिशत जनसंख्या कवरेज सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि जनगणना के दौरान कोई भी व्यक्ति या परिवार छूटने न पाए। साथ ही दोहरी गिनती और आंकड़ों में त्रुटियों को रोकने के लिए सख्त निगरानी, स्पष्ट जवाबदेही और समयबद्ध तैयारियों पर जोर दिया गया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त और जनगणना-2027 की राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुमिता मिश्रा ने सोमवार को हरियाणा निवास, चंडीगढ़ में आयोजित प्रधान जनगणना अधिकारियों के एक दिवसीय सम्मेलन में ये निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जनगणना राष्ट्र निर्माण, विकास योजनाओं और प्रभावी शासन व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी सफलता सटीक आंकड़ों, स्पष्ट प्रशासनिक जिम्मेदारियों और जिला स्तर पर प्रभावी निगरानी पर निर्भर करती है।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि जनगणना के पहले चरण के तहत 51,907 मकान सूचीकरण ब्लॉकों का कार्य पूरा किया जा चुका है। अब दूसरे चरण की तैयारियां की जा रही हैं। इसके तहत प्रदेश के 23 जिलों में लगभग 70,000 जनगणना ब्लॉक बनाए जाने की योजना है। इस चरण में करीब 87,450 गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की तैनाती का अनुमान है, जिनमें आरक्षित कर्मचारी भी शामिल होंगे।
उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे जनगणना की तैयारियों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें, संबंधित अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करें और जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले संभावित समस्याओं की पहचान कर उनका समाधान सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के कार्य को अतिरिक्त विभागीय जिम्मेदारी मानने के बजाय प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि जनगणना में कवरेज, सटीकता और गोपनीयता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों, तेजी से विकसित हो रही आवासीय कॉलोनियों, बहुमंजिला इमारतों, शहरी झुग्गी-बस्तियों और अधिक प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने तकनीक और उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों का उपयोग कर संभावित कमियों और दोहरी गिनती को रोकने पर भी जोर दिया।
राज्य के जनगणना संचालन निदेशक डॉ. ललित जैन ने बताया कि जनगणना-2027 भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी। इसके तहत गणनाकर्ता स्मार्टफोन पर विशेष मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आंकड़े एकत्र करेंगे। इसके अलावा ऑनलाइन स्व-गणना पोर्टल और केंद्रीकृत जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल किया जाएगा।
सम्मेलन में प्रस्तुत कार्यक्रम के अनुसार, नागरिक 10 से 24 जनवरी, 2027 तक स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी, 2027 तक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी। एक से पांच मार्च तक पुनरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, ताकि छूटे हुए परिवारों और आंकड़ों में विसंगतियों की पहचान कर उन्हें ठीक किया जा सके।
जनगणना की संदर्भ तिथि एक मार्च, 2027 को रात 12 बजे निर्धारित की गई है। स्व-गणना करने वाले परिवारों की जानकारी का भी गणनाकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। पर्यवेक्षक 20 प्रतिशत रिकॉर्ड की जांच करेंगे, जबकि संबंधित अधिकारी आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सत्यापन करा सकेंगे।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि जनगणना की सफलता के लिए योग्य कर्मचारियों का चयन, समय पर नियुक्तियां और व्यापक प्रशिक्षण आवश्यक हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रधान जनगणना अधिकारियों से लेकर मास्टर प्रशिक्षकों, फील्ड प्रशिक्षकों, गणनाकर्ताओं और पर्यवेक्षकों तक विस्तारित किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड कर्मचारियों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा जाए और पर्यवेक्षकों के साथ साप्ताहिक बैठकें कर समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए। साथ ही जनगणना कर्मियों के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाएं, सुरक्षा, परिवहन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा।
उन्होंने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान करने के निर्देश भी दिए। सम्मेलन में दी गई जानकारी के अनुसार, जनगणना कर्मियों और पर्यवेक्षकों को दोनों चरणों के लिए कुल 25,000 रुपये मानदेय दिया जाएगा। इसमें मकान सूचीकरण के लिए 9,000 रुपये और जनसंख्या गणना के लिए 16,000 रुपये शामिल हैं।
डॉ. मिश्रा ने जनगणना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसके तहत सोशल मीडिया, शिक्षण संस्थानों, ग्राम पंचायतों, निवासी कल्याण संघों और पारंपरिक प्रचार माध्यमों का इस्तेमाल किया जाएगा। गीता जयंती और सूरजकुंड मेले जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भी जनगणना के बारे में जागरूकता फैलाई जाएगी।
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