चंडीगढ़ , अक्टूबर 09 -- हरियाणा सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश, कारोबार और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए 28 सूत्री सुधार एजेंडा पर काम कर रही है। इसके तहत कारोबारी नियमों को सरल बनाने, सरकारी प्रक्रियाओं में तेजी लाने और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

इस संबंध में नियामकीय प्रक्रियाओं के सरलीकरण और अनुपालन संबंधी बाधाएं कम करने के अभियान के दूसरे चरण की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव के.के. पाठक और हरियाणा के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने की। पाठक ने भवन निर्माण उप-नियमों को सरल बनाने के प्रयासों की सराहना की।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि आठ सुधार प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं, जबकि 18 प्रस्तावों पर सहमति के बाद क्रियान्वयन जारी है। इनमें औद्योगिक विकास, भूमि उपयोग, भवन निर्माण की मंजूरी, श्रम, बिजली कनेक्शन, पर्यावरणीय स्वीकृति, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सुधार शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि हरियाणा विधानसभा ने एक सितंबर को हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक, 2026 पारित किया। इसका उद्देश्य नए उद्यमों की प्रक्रियागत औपचारिकताएं कम करना और एमएसएमई को प्रोत्साहित करना है।

निवेशकों की सुविधा के लिए एचएसआईआईडीसी ने निर्धारित शर्तों के तहत खाली औद्योगिक भूखंड पट्टे पर देने और अनुमत औद्योगिक परियोजनाओं में कुछ बदलावों के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त करने जैसे कदम उठाए हैं। इसके अलावा भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है।

सरकार ने दुकानों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे संचालित करने तथा निर्धारित शर्तों के तहत महिलाओं को रात्रि पाली में रोजगार देने संबंधी प्रावधानों में भी सुधार किए हैं।

इन पहलों से कारोबारियों को अधिक सुविधा मिलने, निवेश बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बैठक में डॉ. राज नेहरू, डॉ. सुमिता मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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