चंडीगढ़ , जनवरी 26 -- हरियाणा सरकार ने राज्य के औद्योगिक और आर्थिक ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से उद्योग श्रमिक मैत्री परिषद का गठन कर दिया है। आगामी वित्तीय वर्ष के राज्य बजट के विचार-विमर्श और निर्माण के लिए गठित इस उच्चस्तरीय परिषद को गवर्नर की मंजूरी मिल चुकी है। परिषद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में कार्य करेगी।

परिषद का मुख्य उद्देश्य बजट निर्माण की प्रक्रिया में उद्योग जगत और श्रमिक वर्ग के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना तथा राज्य में औद्योगिक विकास को नई दिशा देना है। सरकार का मानना है कि इस पहल से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और श्रमिक कल्याण को भी मजबूती मिलेगी।

इस परिषद में श्रम मंत्री अनिल विज, श्रम आयुक्त, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक सचिवों के साथ-साथ औद्योगिक संगठनों और श्रमिक संघों के प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे। परिषद बजट से जुड़े सुझाव देने के अलावा औद्योगिक वातावरण को बेहतर बनाने से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा करेगी।

परिषद का विशेष फोकस न्यूनतम मजदूरी दरों के पुनरीक्षण, औद्योगिक विवादों के शीघ्र समाधान के लिए पांच नए श्रम न्यायालयों की स्थापना, कर्मचारियों के लिए बीमा और सामाजिक सुरक्षा पोर्टल की निगरानी, तथा औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रक्रिया के सरलीकरण और विकेंद्रीकरण पर रहेगा।

हरियाणा सरकार ने बजट से पूर्व ऑल पार्टी मीटिंग बुलाने का भी फैसला किया है। 29 जनवरी को पंचकूला में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बजट को लेकर विपक्षी नेताओं के साथ मंथन करेंगे। इस बैठक में सभी विधायकों, विपक्षी दलों के नेताओं और निर्दलीय प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। विधायक अपनी-अपनी क्षेत्रीय समस्याएं और विकास से जुड़े सुझाव सीधे मुख्यमंत्री के समक्ष रखेंगे, ताकि उन्हें बजट में शामिल किया जा सके।

इस बार हरियाणा के बजट का अनुमान सवा दो लाख करोड़ रुपये तक लगाया जा रहा है, जो राज्य के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट माना जा रहा है।

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