चंडीगढ़ , जून 25 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 'हरियाणा विजन-2047' के तहत उच्च शिक्षा विभाग की पांच वर्षीय कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुखी बनाने पर जोर दिया। बैठक में एआई आधारित शिक्षण, विश्वविद्यालयों की वैश्विक रैंकिंग, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों पर चर्चा हुई।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य के 22 मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों को स्वायत्त संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्मार्ट कक्षाएं, डिजिटल पुस्तकालय और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने सभी निर्माणाधीन शैक्षणिक परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिये।

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क ( एनआईआरएफ) में अपने शिक्षण संस्थानों को शीर्ष-150 में शामिल कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग, छात्र विनिमय कार्यक्रम, अनुसंधान गतिविधियों और पेटेंट संस्कृति को बढ़ावा दिया जाएगा।

बैठक में पंचकूला और गुरुग्राम में स्थापित होने वाले 'स्वायत्त एआई डिजिटल कॉलेजों' की प्रगति की भी समीक्षा की गयी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों के अनुरूप तैयार करना समय की मांग है। साथ ही सरकारी कॉलेजों में स्नातक स्तर की छात्राओं की ट्यूशन फीस माफी योजना की जानकारी भी दी गयी।

अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए सरकार पेटेंट पंजीकरण शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 50 हजार रुपये) और 10 करोड़ रुपये के उच्च शिक्षा गुणवत्ता एवं अनुसंधान कोष की स्थापना कर रही है। इसके अलावा इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट के लिए एकीकृत डिजिटल पोर्टल भी विकसित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने छात्राओं को स्कूटर उपलब्ध कराने वाली 'अव्वल बालिका योजना' में तेजी लाने और शिक्षा से वंचित विद्यार्थियों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित कर हरियाणा को उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाया जाएगा।

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