चंडीगढ़ , सितंबर 16 -- हरियाणा में आत्महत्या रोकथाम माह के तहत भावनात्मक संकट की शीघ्र पहचान परामर्श, समय पर पेशेवर हस्तक्षेप और चौबीसों घंटे मानसिक स्वास्थ्य सहायता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विभिन्न कार्यस्थलों पर जागरूकता और परामर्श सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम को केवल मानसिक बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं किया जा सकता। परिवार, शैक्षणिक संस्थान, कार्यस्थल, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता और समुदाय मिलकर भावनात्मक संकट की पहचान करें और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर सहायता उपलब्ध कराएं।

राज्य की जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (डीएमएचपी) सेवाएं अब हर जिले में संचालित हैं। इसके तहत आकलन, परामर्श, उपचार और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ सेवाओं के लिए रेफरल की सुविधा उपलब्ध है। तत्काल सहायता के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 और 1-800-891-4416 पर 24 घंटे सहायता उपलब्ध है।

डॉ. मिश्रा के अनुसार, 10 अक्टूबर 2022 से टेली-मानस पर अब तक 19,773 कॉल प्राप्त हुई हैं। इनमें 92.4 प्रतिशत कॉल लाभार्थियों ने सीधे कीं। करीब 82 प्रतिशत कॉल करने वाले 18 से 45 वर्ष की आयु के हैं। उदासी और अवसाद से संबंधित चिंताओं के अलावा परीक्षा, काम और रिश्तों का तनाव, चिंता, नशीली दवाओं का सेवन और नींद संबंधी समस्याएं प्रमुख कारण रहे। जनवरी 2026 से अब तक 9,106 कॉल प्राप्त हुई हैं।

उन्होंने बताया कि छात्रों और युवाओं के भावनात्मक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, करियर की अनिश्चितता, पारिवारिक अपेक्षाएं, रिश्तों की समस्याएं, साइबरबुलिंग, सोशल मीडिया का दबाव, अकेलापन और नशे को प्रमुख जोखिम कारकों के रूप में देखा जा रहा है।

विभाग ने परिवारों, शिक्षकों और मित्रों से लगातार उदासी, सामाजिक अलगाव, नींद या भूख में बदलाव, पढ़ाई या काम में रुचि कम होना तथा मृत्यु या आत्महत्या का जिक्र जैसे संकेतों को गंभीरता से लेने की अपील की है। ऐसे व्यक्ति को अकेला न छोड़कर जल्द पेशेवर सहायता से जोड़ने की सलाह दी गई है।

राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए 23 जिला सिविल अस्पताल, 50 उप-मंडल अस्पताल और 122 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों समेत 195 स्वास्थ्य संस्थानों का नेटवर्क 3,214 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों से जोड़ा गया है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि आत्महत्या रोकथाम को एक दिवसीय अभियान नहीं, बल्कि निरंतर सार्वजनिक स्वास्थ्य जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

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