चंडीगढ़ , अगस्त 09 -- ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने रविवार को कहा कि हरियाणा के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल के समर्थन में 11 अगस्त को देशभर में लंच ऑवर (भाेजनावकाश ) के दौरान प्रदर्शन किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हरियाणा के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर बार-बार हुई वार्ताओं के विफल रहने के बाद 11 अगस्त से तीन दिन की राज्यव्यापी हड़ताल पर जाने को मजबूर हुए हैं। इन वार्ताओं में हरियाणा के बिजली मंत्री ने भी भाग लिया था, लेकिन प्रमुख मुद्दों का समाधान नहीं हो सका। एआईपीईएफ के अनुसार, हड़ताल के पीछे दो प्रमुख मुद्दे राष्ट्रीय महत्व के हैं। इनमें गुरुग्राम और नूंह क्षेत्र में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस जारी करने का प्रस्ताव तथा अलग कृषि डिस्कॉम बनाने का प्रस्ताव शामिल है। बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को आशंका है कि इस तरह के पुनर्गठन से भविष्य में सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनियों के विखंडन, कॉरपोरेटकरण, विनिवेश और निजीकरण का रास्ता खुल सकता है तथा इन्हें शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने की संभावना भी बन सकती है।

श्री दुबे ने बताया कि मेदांता समूह से जुड़ी 'इलेवन पावर कंपनी' ने गुरुग्राम-नूंह क्षेत्र में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। संगठन ने कहा कि कंपनी के पास बिजली वितरण क्षेत्र में स्थापित अनुभव का रिकॉर्ड नहीं है। कर्मचारियों और इंजीनियरों को आशंका है कि इस प्रस्ताव के पीछे व्यापक कॉरपोरेट हित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि समानांतर वितरण लाइसेंस बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण का पिछला दरवाजा साबित हो सकते हैं। इससे निजी कंपनियां लाभदायक उपभोक्ताओं और क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर सकती हैं, जबकि सार्वजनिक डिस्कॉम पर ग्रामीण, कृषि और कम लाभ वाले उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बनी रहेगी। उन्होंने अलग कृषि डिस्कॉम बनाने के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हरियाणा पहले ही कृषि फीडरों का शत-प्रतिशत पृथक्करण कर चुका है। ऐसे में अलग कृषि डिस्कॉम बनाने का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। संगठन के अनुसार यह केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं है, बल्कि इससे हरियाणा की सार्वजनिक बिजली वितरण व्यवस्था के स्वामित्व और स्वरूप पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

एआईपीईएफ के मीडिया सलाहकार वी.के. गुप्ता ने बताया कि ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने की अपील की है। संगठन ने मुख्यमंत्री से समानांतर वितरण लाइसेंस और अलग कृषि डिस्कॉम से संबंधित दोनों प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा करने की मांग की है।

एआईपीईएफ ने कहा कि बिजली क्षेत्र में संभावित औद्योगिक अशांति को रोकने और कर्मचारियों की चिंताओं का समाधान करने के लिए सरकार की ओर से तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।

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