चंडीगढ़ , फरवरी 27 -- हरियाणा अधिकार सेवा आयोग ने नागरिक सेवाओं में देरी और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अंबाला की एक महिला शिकायतकर्ता को मुआवजा देने का ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है।

आयोग ने अंबाला निवासी श्रीमती सुरजीत कौर के नए प्रॉपर्टी आईडी जारी करने के मामले में हुई देरी और गलत तथ्यों को आधार बनाकर अपील निरस्त करने पर संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई है। पूरा मामला प्रॉपर्टी आईडी को अधिकृत श्रेणी में दर्शाने से जुड़ा था।

आयोग के संज्ञान में आया कि शिकायतकर्ता की अपीलों को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफजीआरए) स्तर पर पहले ही निरस्त कर दिया गया था। नगर निगम ने शुरुआत में प्लॉट को अनधिकृत बताया था लेकिन आयोग के हस्तक्षेप और विस्तृत जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि संपत्ति अधिकृत क्षेत्र की सीमा पर स्थित है। इसके बाद गत नौ फरवरी को पारित अंतरिम आदेश के जरिए संपत्ति को अधिकृत श्रेणी में शामिल किया गया।

आयोग ने सेवा का अधिकार अधिनियम 2014 का हवाला देते हुए कहा कि अपीलों के निस्तारण के लिए 30 कार्य दिवस का समय निर्धारित है जिसका पालन नहीं किया गया। इस लापरवाही के लिए आयोग ने नौ अक्टूबर और एक दिसंबर 2025 को अपील निरस्त करने वाले तत्कालीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था ।

उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया था कि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश क्यों न की जाए शिकायतकर्ता को हुई मानसिक और प्रशासनिक असुविधा के बदले आयोग ने 5,000 रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। यह राशि नगर निगम अंबाला के कोष से दी जाएगी राशि को बाद में दोषी अधिकारियों से लेकर वापस कोष में जमा कराया जाएगाआयोग ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 13 मार्च तक मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ तो अधिनियम की धारा 17(2) के तहत अतिरिक्त दंड लगाया जाएगा। नगर निगम आयुक्त को 16 मार्च तक अनुपालना रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं।

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