बेंगलुरु , अगस्त 17 -- कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख बी.के. हरिप्रसाद ने सोमवार को राष्ट्रगीत वंदे मातरम् विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस को देशभक्ति के मामले में उस संगठन से प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं है जिसने अपनी शाखाओं में कभी राष्ट्रगीत नहीं गाया है।
श्री हरिप्रसाद ने यहाँ पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कोई विवाद नहीं है और उन्होंने इस मुद्दे पर कुलपतियों की प्रतिक्रिया का बचाव किया।
उन्होंने कहा, "कोई विवाद नहीं है। उन्होंने सही जवाब दिया है। आरएसएस ने अपनी शाखाओं में अपना जवाब दिया है। मैं इसके लिए उन्हें बधाई देता हूँ।"उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और तिरंगे का सम्मान किया है और पार्टी की देशभक्ति पर सवाल उठाने की भाजपा की कोशिश को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "1925 से 2026 तक आरएसएस ने अपनी शाखाओं में वंदे मातरम् नहीं गाया है। कांग्रेस में हम हर बैठक और कार्यक्रम में वंदे मातरम् गाते हैं। हमें देशभक्ति पर उनसे प्रमाणपत्र की ज़रूरत नहीं है।"उन्होंने आरएसएस के पूर्व विचारक एम.एस. गोलवलकर की लिखी बातों का हवाला देते हुए राष्ट्रीय प्रतीकों पर आरएसएस के ऐतिहासिक रुख पर भी सवाल उठाए।
श्री हरिप्रसाद ने आरोप लगाया कि गोलवलकर ने तिरंगे, संविधान और राष्ट्रगान को स्वीकार करने का विरोध किया था। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आरोप लगाया कि वे संघ के ऐतिहासिक रुख को नज़रअंदाज़ करते हुए कांग्रेस से जुड़े विवादों को चुन-चुनकर उठाते हैं।
उन्होंने कहा, "लोग अलग-अलग तरह से व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन मैं आपको वही बता रहा हूँ जो मैंने देखा और समझा है। हम उनसे देशभक्ति नहीं सीख सकते।"उन्होंने पूर्व पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ कथित तौर पर दर्ज शिकायतों पर कहा कि यह विवाद खड़ा करने की कोशिश है। प्रदेश कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि श्रीमती गांधी ने पार्टी पदाधिकारियों से केवल किसी भी गलती को सुधारने के लिए कहा था और बाद में कांग्रेस ने स्पष्टीकरण जारी किया था।
श्री हरिप्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी मंगवाने के उनके फैसले का बचाव करते हुए कहा कि यह एक वरिष्ठ नेता के प्रति सम्मान दिखाने का तरीका था। उन्होंने कहा, " श्री खरगे एक वरिष्ठ नेता हैं। अगर वह ज़्यादा देर तक खड़े नहीं रह सकते, तो उनके लिए कुर्सी लाने में क्या बुराई है , श्रीमती गांधी ने कुर्सी लाने के लिए कहा था। यह बड़ों का सम्मान करने की बात है।"श्री हरिप्रसाद ने सवाल उठाया कि इस घटना को लेकर कांग्रेस को क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ी दूसरी घटनाओं में ऐसी जांच-पड़ताल नहीं की जाती।
उन्होंने श्री शाह पर यह आरोप भी लगाया कि वह कांग्रेस से जुड़े पुराने विवादों को तो चुन-चुनकर उठाते हैं, लेकिन आरएसएस के वैचारिक इतिहास से जुड़े सवालों से बचते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा गोलवलकर से जुड़े विचारों को "एक-एक कदम करके" लागू करने की कोशिश कर रही है और कहा कि ऐसा एजेंडा देश को मंज़ूर नहीं होगा।
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