नैनीताल , अप्रैल 07 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने तीर्थ नगरी हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे रायवाला से भोगपुर तक अवैध खनन के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए स्टोन क्रशर मालिको से कहा है कि वे अपने सीज वाहनों को छुड़ा सकते है लेकिन जब्त माल को बिना अदालत की अनुमति के बेच नही सकते हैं।

न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मातृ सदन की तरफ से कहा गया कि 30 जुलाई 2025 को कोर्ट ने स्टोन क्रेशरों के संचालन पर रोक लगाई थी। उसके बाद भी इनके द्वारा अवैध रूप से खनन कार्य किया जा रहा है। इसका बिरोध करते हुए स्टोन क्रशर मालिकों की तरफ से कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बाद उनके स्टोन क्रशर में लगे वाहन सीज हो चुके हैं।लिहाजा उनको रिलीज कराए जाने की अनुमति दी जाय। फिलहाल कोर्ट ने दो स्टोन क्रेशरों की मशीनों को रिलीज करने के आदेश दे दिए हैं।

याचिकाकर्ता संस्था मातृ सदन की ओर से कहा गया कि कोर्ट के आदेश पर सीज किये गए वाहनों की नीलामी की जाय। उनसे मिलने वाली रकम को पर्यावरण की देख रेख मे खर्चा किया जाय।

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