नैनीताल , अप्रैल 16 -- उत्तराखंड में तीर्थ नगरी हरिद्वार में गंगा तट के किनारे मौजूद नौ और स्टोन क्रेशर पर बंदी की तलवार लटक रही है। इस मामले में अदालत ने सरकार को दो सप्ताह में आपत्ति पेश करने के निर्देश दिए हैं।
हरिद्वार निवासी अशोक कुमार की ओर से इस मामले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की ओर से कनखल स्थित मातृसदन संस्था की ओर से दायर जनहित याचिका में हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र दायर कर मामले को चुनौती दी है। इस प्रकरण में गत सात अप्रैल को सुनवाई हुई लेकिन आदेश की प्रति आज प्राप्त हुई।
प्रार्थना पत्र में कहा गया कि उच्च न्यायालय ने मातृसदन की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 30 जुलाई 2025 को जारी अपने महत्वपूर्ण आदेश में रायवाला से भोगपुर तक गंगा किनारे संचालित होने वाले 48 स्टोन क्रेशरों को बंद करने के निर्देश दे दिए थे। इसके बाद सभी स्टोन क्रेशर को सील कर दिया गया था।
आगे कहा गया कि हरिद्वार के लक्सर तहसील में भोगपुर से सुल्तानपुर के बीच गंगा नदी के तट पर 09 स्टोन क्रेशर संचालित हो रहे हैं। ये सभी स्टोन क्रेशर गंगा तट से 05 किमी के दायरे में संचालित हो रहे हैं जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान के साथ ही अवैध खनन को भी बढ़ावा मिलने की आशंका है।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि इन स्टोन क्रेशरों में अवनी स्टोन क्रेशर, मां गंगा स्टोन क्रेशर, अलकनंदा स्टोन क्रेशर, शुभ स्टोन क्रेशर, नेशनल स्टोन क्रेशर, तुलसी स्टोन क्रेशर, वानिया स्टोन क्रेशर और किशन स्टोन क्रेशर शामिल हैं।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वीरेंद्र अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से इस मामले में आपत्ति पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा गया। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब इस मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई होगी।
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