हरिद्वार , अप्रैल 29 -- उत्तराखंड में हरिद्वार जिला योजना समिति की बैठक बुधवार को उस समय विवाद और हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब बैठक शुरू होते ही कांग्रेस और बसपा के विधायकों ने तीखा विरोध जताया। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के सभागार में पहुंचते ही विपक्षी विधायकों ने टेबल पर रखी बुकलेट उठाकर फेंक दी और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
बैठक स्थल पर "धामी सरकार मुर्दाबाद" के नारे गूंजते रहे, जिससे कुछ देर के लिए माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत, रवि बहादुर और बसपा विधायक शहजाद अली समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने बैठक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
विपक्ष का आरोप था कि जिला योजना की बैठकों में पारदर्शिता का अभाव है और विकास योजनाएं जनहित के बजाय ठेकेदारों के हित में तैयार की जा रही हैं। साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया गया। बसपा विधायकों ने भी कांग्रेस के आरोपों का समर्थन करते हुए बैठक की प्रक्रिया को गलत ठहराया।
हंगामे के चलते बैठक की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही और प्रशासनिक अधिकारियों को स्थिति नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि, बाद में हालात सामान्य करने की कोशिश की गई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा।
इस बीच कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में बैठक जारी रही जिसमें भाजपा के विधायक और जिला पंचायत सदस्य शामिल रहे। वहीं कांग्रेस और बसपा के विधायक जिला कलेक्टर परिसर में धरने पर बैठ गए और अपना विरोध दर्ज कराया।
पूरे घटनाक्रम ने जिला योजना समिति की बैठकों की कार्यशैली और पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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