भुवनेश्वर , जून 03 -- ओडिशा ने सतत शहरी परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरित हाइड्रोजन गतिशीलता परियोजना को आगे बढ़ाने की पहल की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत राज्य में हाइड्रोजन ईंधन आधारित सार्वजनिक परिवहन सेवा शुरू की जाएगी। यह परियोजना कैपिटल रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट (सीआरयूटी), एनटीपीसी और ग्रिडको के संयुक्त सहयोग से विकसित की जा रही है।

परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए बुधवार को आवास एवं शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव उषा पाढ़ी की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गयी। बैठक में स्वच्छ परिवहन समाधान और हरित ऊर्जा की दिशा में राज्य के प्रयासों को गति देने पर चर्चा हुई। यह परियोजना भारत सरकार के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है और शुद्ध-शून्य उत्सर्जन (नेट जीरो) लक्ष्य प्राप्त करने के साथ स्वदेशी स्वच्छ ईंधन तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बैठक में एनटीपीसी, ग्रिडको और सीआरयूटी के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गयी। प्रस्तावित योजना के तहत भुवनेश्वर स्थित सीआरयूटी के पोखरीपुट डिपो में हरित हाइड्रोजन उत्पादन एवं रीफ्यूलिंग सुविधा स्थापित की जाएगी। पायलट परियोजना के पहले चरण में तीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जायेगा।

परियोजना के तहत प्रतिदिन लगभग 260 किलोग्राम हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इन बसों की क्षमता आदर्श परिस्थितियों में प्रतिदिन लगभग 600 किलोमीटर तक संचालन की होगी। अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना सार्वजनिक परिवहन के लिए स्वच्छ और दक्ष विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रतिवर्ष लगभग 900 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाने में भी सहायक होगी।

परियोजना की कुल लागत 53.55 करोड़ रुपये आंकी गयी है। इसमें से 19.52 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत स्वीकृत की जा चुकी है। शेष राशि भागीदार संस्थाओं के योगदान और राज्य सरकार की सहायता से जुटाई जाएगी।बैठक में परिचालन व्यवस्था, मार्ग निर्धारण, वित्तीय व्यवहार्यता, जोखिम साझा करने की व्यवस्था तथा विभिन्न संस्थाओं की जिम्मेदारियों पर विस्तृत चर्चा हुई। समझौते के अनुसार एनटीपीसी हाइड्रोजन उत्पादन और रीफ्यूलिंग अवसंरचना का विकास एवं संचालन करेगा, ग्रिडको विद्युत आपूर्ति और संबंधित रियायतें उपलब्ध कराएगा, जबकि सीआरयूटी बस संचालन और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेगा।

बैठक में परियोजना के वित्तीय और परिचालन प्रभावों का भी मूल्यांकन किया गया। सीआरयूटी द्वारा परिचालन व्यय, सुनिश्चित किलोमीटर संचालन, राजस्व साझेदारी और जोखिम वितरण से जुड़े मुद्दे उठाये गये, जिन पर विस्तार से विचार किया गया।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में यह एक अग्रणी तकनीकी पहल है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता के लिए ऐसा संतुलित ढांचा आवश्यक होगा जो सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा के साथ परिचालन स्थिरता भी सुनिश्चित करे। परियोजना के तहत भुवनेश्वर-कटक-खुर्दा-पुरी-कोणार्क गलियारे में बसों के संचालन का सुझाव दिया गया, ताकि परियोजना की व्यवहार्यता का प्रभावी प्रदर्शन किया जा सके।

भूमि आवंटन, नियामकीय स्वीकृतियों, व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गयी। परियोजना को सुचारु रूप से लागू करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार किया गया।

सुश्री पाढ़ी ने कहा कि हरित हाइड्रोजन गतिशीलता परियोजना ओडिशा को अगली पीढ़ी के स्वच्छ परिवहन समाधान विकसित करने वाले अग्रणी राज्यों की श्रेणी में ला सकती है। उन्होंने सभी भागीदार एजेंसियों को लंबित तकनीकी, वित्तीय और नियामकीय मुद्दों का शीघ्र समाधान कर समन्वित रूप से कार्य करने के निर्देश दिये।

उन्होंने परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और दीर्घकालिक परिचालन व्यवहार्यता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया। बैठक में परियोजना की निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत बनाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

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