भोपाल , जून 04 -- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने लोगों से हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) के कार्यपालन संचालक सुधीर कुमार कोचर के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में श्रीमती घारू ने कहा कि धरती बहस या समझौता नहीं करती, बल्कि संकेत देती है। पिघलते ग्लेशियर, बढ़ता तापमान और बदलता पर्यावरण ऐसे संकेत हैं, जिन्हें गंभीरता से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि इन संकेतों की अनदेखी की गई तो भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट उत्पन्न हो सकता है।
उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस को केवल नारे और औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार और दैनिक जीवन से पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत करनी चाहिए।
कार्यक्रम में इस वर्ष की थीम 'क्लाइमेट एक्शन-मिशन लाइफ' पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विद्यार्थियों और महिलाओं से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
श्रीमती घारू ने बच्चों को सौर ऊर्जा के महत्व से अवगत कराते हुए कम लागत में सौर कुकर तैयार करने की सरल विधि भी समझाई। उन्होंने कहा कि हरित विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सौर ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का अधिकाधिक उपयोग आवश्यक है।
उन्होंने पौधरोपण को भी पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि पौधे उचित मौसम और सुरक्षित वातावरण में लगाए जाएं, ताकि उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके। केवल रिकॉर्ड या औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से पौधरोपण किया जाना चाहिए।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित