अमृतसर , जुलाई 14 -- श्री अकाल तख्त साहिब ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) और खालसा पंथ के सहयोग से मंगलवार को हरिके पत्तन में पंथक शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा तथा वर्ष 1984 और उसके बाद के दौर में शहीद हुए सभी सिखों की स्मृति में विशेष अरदास समारोह आयोजित किया।

इस दौरान शहीदों के परिवारों और सिख समुदाय को न्याय मिलने की भी अरदास की गयी। समारोह के दौरान श्री गुरु ग्रंथ साहिब का विशेष पालकी साहिब में प्रकाश किया गया। इसके बाद श्री सुखमनी साहिब का पाठ और सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के हजूरी रागी भाई सिमरप्रीत सिंह ने गुरबाणी कीर्तन किया। समापन अरदास श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यवाहक जत्थेदार एवं तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने की।

अरदास के दौरान जत्थेदार गड़गज्ज ने उन लोगों को याद किया, जिन्हें कथित तौर पर "लावारिस" घोषित कर अंतिम संस्कार कर दिया गया या जिनके शव नदियों में बहा दिये गये। उन्होंने खालसा पंथ को न्याय की लड़ाई जारी रखने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

समागम को संबोधित करते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने हरिके पत्तन को "सिख शहीदी पत्तन" घोषित करते हुए एसजीपीसी को खालसा पंथ के सहयोग से यहां 'शहीदी पत्तन स्मारक' बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस स्मारक में उन शहीदों की स्मृति को संरक्षित किया जाएगा, जिनके शव कथित तौर पर हरिके क्षेत्र की नदियों में प्रवाहित किए गए थे।

जत्थेदार गड़गज्ज ने घोषणा की कि श्री अकाल तख्त साहिब, एसजीपीसी के माध्यम से 1982 से 1995 के दौरान मारे गये, लावारिस घोषित किये गये और परिजनों को सौंपे बिना अंतिम संस्कार किए गए सभी सिखों का विस्तृत दस्तावेज तैयार करेगा। यह रिकॉर्ड श्री अकाल तख्त साहिब के आधिकारिक अभिलेख का हिस्सा होगा।

एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने कथित तौर पर "लावारिस" घोषित कर अंतिम संस्कार किये गये युवाओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण उनका अपहरण किया गया, उन्हें यातनाएं दी गयी और बाद में उनकी हत्या कर शव नदी में बहा दिया गया।

धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा सिख पंथ के सम्मानित शहीद हैं और श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशानुसार एसजीपीसी हरिके पत्तन में शहीदी स्मारक का निर्माण करेगी, जहां शहीदों के नाम अंकित किये जायेंगे। उन्होंने शहीदों के परिजनों और उस दौर से संबंधित जानकारी रखने वाले लोगों से अपील की कि वे उपलब्ध दस्तावेज और सूचनाएं एसजीपीसी को उपलब्ध करायें, ताकि सभी शहीदों का प्रमाणिक एवं विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।

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