हरिद्वार , अक्टूबर 25 -- पांच दिन से गंगा जल के अभाव में सूनी पड़ी उत्तराखंड में हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर रविवार को एक बार फिर रौनक लौट आई। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की ओर से गंगा जल की व्यवस्था किए जाने के बाद श्रद्धालुओं ने हरकी पैड़ी पर आस्था की डुबकी लगाई। घाटों पर पानी पहुंचने से तीर्थ पुरोहितों, पंडितों और फल-फूल व प्रसाद विक्रेताओं के चेहरे भी खिल उठे।

दरअसल, संजय पुल के नीचे प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी भरकर अस्थायी बांध बनाया गया है। इसके माध्यम से गंगा जल को हरकी पैड़ी की ओर मोड़ा जा रहा है। पानी की उपलब्धता होने के बाद घाटों पर स्नान, दान और पूजा-पाठ की गतिविधियां फिर से शुरू हो गई हैं।

हर साल दशहरे के अवसर पर गंगनहर की वार्षिक बंदी की जाती है, जो दिवाली तक चलती है। इस दौरान नहर में पानी की आपूर्ति रोककर सफाई और मरम्मत का कार्य किया जाता है। इसका असर हरकी पैड़ी समेत आसपास के घाटों पर भी पड़ता है। बीते पांच दिनों से हरकी पैड़ी पर गंगा जल का प्रवाह लगभग बंद होने के कारण घाटों पर पानी का स्तर काफी कम हो गया था। स्थिति यह थी कि आचमन के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं था। ऐसे में हरिद्वार पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को दूसरे घाटों पर स्नान करना पड़ रहा था, जबकि कई श्रद्धालुओं को निराशा का सामना करना पड़ा।

गंगा जल की कमी का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ा। हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं की आवाजाही घटने से तीर्थ पुरोहितों, फल-फूल और प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था।

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