कोडागु/चामराजनगर , अगस्त 16 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रविवार को चामराजनगर जिले के हनूर तालुक में वन विभाग के कर्मचारियों की गोलीबारी में तीन लोगों की मौत की घटना की मजिस्ट्रेट से जांच कराने का आदेश दिया। इस घटना पर ईसाई समुदाय के नेताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे थे।

श्री शिवकुमार ने कहा कि उन्हें वन विभाग के अधिकारियों से सीधी जानकारी और रिकॉर्ड मिले हैं और एक बंदूक तथा जंगली जानवर का मांस होने के संदेह वाले दो बैग ज़ब्त किए गये हैं। उन्होंने कोडागु में पत्रकारों से कहा, "अधिकारियों ने मुझे बताया है कि एक बंदूक ज़ब्त की गयी है। जंगली जानवर का मांस भरे दो बैग भी ज़ब्त किए गये हैं।" मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति घटनास्थल से भाग गया था, जबकि अधिकारी और जानकारी जुटा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट स्तर की जांच से सच्चाई का पता चलेगा और मौत की परिस्थितियों का निर्धारण होगा। श्री शिवकुमार ने कहा कि सरकार प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा देने पर भी विचार कर रही है ।इस बीच, मराटाल्ली ग्राम पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सेल्वम ने इन मौतों के बाद ईसाई समुदाय के नेताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाये। एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा कि मृतकों के परिवारों को उम्मीद थी कि समुदाय के नेता इस बारे में बोलेंगे और अपनी चिंताएं जाहिर करेंगे, लेकिन उन्हें निराशा हुई कि किसी भी बड़े प्रतिनिधि ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर बात नहीं की।

उन्होंने खास तौर पर ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज और कांग्रेस नेता इवान डिसूजा से अपील की कि वे इस घटना पर प्रतिक्रिया दें और पीड़ित परिवारों का साथ दें। श्री सेल्वम ने कहा, "कर्नाटक में हम लगभग 13 लाख ईसाई हैं। अगर किसी दूसरे समुदाय के तीन लोगों की ऐसी परिस्थितियों में मौत हुई होती, तो बड़ी प्रतिक्रिया हुई होती। लेकिन हमारे समुदाय के नेता आगे नहीं आए हैं।" उन्होंने सवाल किया कि समुदाय के प्रतिनिधियों के बोलने से पहले और कितनी मौतें होनी चाहिए, और श्री जॉर्ज तथा डिसूजा से घटना पर बयान जारी करने का आग्रह किया।

श्री सेल्वम ने कहा कि ईसाई समुदाय के सदस्यों ने जिम्मेदार पदों पर बैठे चुने हुए प्रतिनिधियों पर भरोसा किया था और उम्मीद की थी कि जब भी समुदाय के सदस्यों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, तो वे दखल देंगे। इन मौतों के कारण हनूर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। स्थानीय निवासी और पीड़ित परिवार जंगल में लगी आग से जुड़ी परिस्थितियों पर सवाल उठा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने शामिल अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराने की भी मांग की है।

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