हनुमानगढ़ , मई 30 -- राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले में पीलीबंगा में दो दिन से चले आ रहे किसानों के धरने और रेलवे मार्ग अवरुद्ध करने वाले आंदोलन के बाद जिला प्रशासन ने शनिवार को किसानों को बैग उपलब्ध होने तक हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर जिलों में गेहूं की खरीद जारी रखने का आश्वासन दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रशासन ने हनुमानगढ़ जिले के लिए आठ लाख बैग और श्रीगंगानगर जिले के लिए 11 लाख बैग उपलब्ध कराने का वायदा किया है। किसान संगठनों ने गेहूं खरीद अवधि बढ़ाने, खरीद लक्ष्य बढ़ाने और बैग की कमी दूर करने की मांग को लेकर गुरुवार से पीलीबंगा में उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर धरना शुरू किया था। किसान संगठनों का आंदोलन शुक्रवार को सड़क अवरुद्ध करने के बाद आज उग्र हो गया। आंधी-बारिश के बीच सैकड़ों किसान रेलवे ट्रैक पर पहुंच गए और करीब एक घंटे तक ट्रेन आवागमन पूरी तरह रोक दिया।
किसानों ने नारेबाजी की और प्रशासन से अपनी मांगों को तुरंत मानने का आग्रह किया। इस आंदोलन का नेतृत्व ग्रामीण मजदूर किसान समिति और वामपंथी दलों सहित कई किसान संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। किसानों की मुख्य शिकायत यह थी कि मंडियों में अभी भी बड़ी मात्रा में गेहूं पड़ा हुआ है, लेकिन बैग की कमी, स्लॉट बुकिंग में देरी और खरीद केंद्रों पर उठाव की धीमी गति के कारण उनकी उपज की खरीद नहीं हो पा रही है। इस वर्ष गेहूं का रकबा और उत्पादन बढ़ा है, जिसके बावजूद निर्धारित लक्ष्य अपेक्षाकृत कम होने से समस्या गंभीर हो गई।
हनुमानगढ़ के कलेक्टर खुशाल यादव, पुलिस अधीक्षक नरेंद्रसिंह मीणा सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ किसान प्रतिनिधियों की लंबी वार्ता हुई। वार्ता में प्रशासन ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि हनुमानगढ़ जिले को आठ लाख और श्रीगंगानगर जिले को 11 लाख बैग उपलब्ध कराए जाएंगे। फिलहाल 75 हजार बैग पहुंच चुके हैं और बैग उपलब्ध होने एवं भरने तक दोनों जिलों में गेहूं खरीद पूरी तरह जारी रहेगी। प्रशासन ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 10 जून तक का समय मांगा है। किसानों ने प्रशासन के इस आश्वासन पर सहमति जताते हुए आंदोलन स्थगित कर दिया। हालांकि किसान नेताओं ने साफ चेतावनी दी कि अगर 10 जून तक वादे पूरे नहीं हुए तो वे फिर से कलेक्ट्रेट पर बड़ा आंदोलन करेंगे।
इस सीजन में हनुमानगढ़ जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य सात लाख 52 हजार टन रखा गया था, जिसमें करीब 90 प्रतिशत खरीद हो चुकी है। इसके बावजूद मंडियों में काफी गेहूं बचा हुआ है। किसान चाहते हैं कि सभी किसानों की उपज न्यनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाए और कोई भी किसान अपनी फसल लेकर लौटने पर मजबूर न हो।
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