नयी दिल्ली , जुलाई 23 -- उच्चतम न्यायालय ने मेघालय के चर्चित हनीमून हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए वह राहत पाने की हकदार नहीं हैं।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने मेघालय सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय और ट्रायल कोर्ट, दोनों के जमानत आदेश रद्द कर दिये। शीर्ष अदालत ने सोनम को आत्मसमर्पण के लिए तीन सप्ताह का समय दिया और कहा कि यदि छह माह में मुकदमा पूरा नहीं होता है तो वह दोबारा जमानत याचिका दायर कर सकती हैं।

पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए जाने और उपलब्ध कराए गए आधारों की पर्याप्तता अलग-अलग मुद्दे हैं। केवल आधारों की कथित कमी से गिरफ्तारी स्वतः अवैध नहीं हो जाती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए जाने से आगे की जांच के लिए दोबारा गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगती।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सोनम की जमानत की तीन पूर्व याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी थीं और अब मुकदमे की सुनवाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में उनका जमानत पर बाहर रहना सुनवाई को प्रभावित कर सकता है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने युवा पीढ़ी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी के पास जानकारी अधिक है, लेकिन दबाव झेलने की क्षमता अपेक्षाकृत कम है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की इस टिप्पणी पर कि आज की पीढ़ी के पास सूचना अधिक, लेकिन ज्ञान कम है, न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि व्हाट्सएप पर साझा की जाने वाली बातों को ही ज्ञान मान लिया जाता है।

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