अमृतसर , मई 30 -- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने महाराष्ट्र के तख्त श्री हजूर साहिब में सिख श्रद्धालुओं, शस्त्र विक्रेताओं और धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों तथा बड़ी संख्या में कृपाणों और अन्य शस्त्रों की जब्ती को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि इससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत हुयी हैं।
श्री धामी ने यहां शनिवार को जारी बयान में कहा कि सिख धर्म में शस्त्रों का विशेष महत्व है और गुरु साहिबानों ने प्रत्येक सिख को शस्त्रधारी रहने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि शस्त्र सिख रहित-रीति और धार्मिक पहचान का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि तख्त श्री हजूर साहिब वह पवित्र स्थल है, जहां सदियों से शस्त्रों की सेवा और सम्मान सिख परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई ने सिख समुदाय में व्यापक रोष पैदा किया है।
एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि कानून का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है, लेकिन कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सिख धर्म की धार्मिक भावनाओं, मर्यादाओं और ऐतिहासिक परंपराओं का पूरा सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी कोई भी कार्रवाई नहीं करनी चाहिए, जिससे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हों।
श्री धामी ने महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन से मांग की कि सिख श्रद्धालुओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज किए गए मामलों को तत्काल रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय हमेशा अपने धार्मिक प्रतीकों, शस्त्र परंपरा और गुरु साहिबानों द्वारा प्रदान की गई विशिष्ट पहचान की रक्षा करता आया है और सरकारों को भी सिख परंपराओं की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना सभी सरकारों और प्रशासनिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है, ताकि विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास और सौहार्द कायम रह सके।
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