रांची , जुलाई 29 -- झारखंड हाई कोर्ट में ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट (ओपन जेल) की स्थापना से जुड़े मामले में बुधवार को सुनवाई हुई।
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मयंक विभोर ने पक्ष रखते हुए ओपन जेल योजना की प्रगति रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। मामले की अगली सुनवाई अब 10 सितंबर को होगी।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि हजारीबाग में ओपन जेल की स्थापना के लिए 32 एकड़ सरकारी भूमि चिन्हित कर ली गई है। इस परियोजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी आईएएस अधिकारी वंदना डाडेल को सौंपी गई है। साथ ही योजना की निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन कर उसमें संबंधित अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी गई है।
राज्य सरकार ने यह भी बताया कि प्रस्तावित ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट में महिला कैदियों के लिए अलग और विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। यह योजना सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है और इसे मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।
सरकार ने अदालत को जानकारी दी कि हजारीबाग में स्थायी ओपन जेल के निर्माण में समय लगने के कारण अंतरिम व्यवस्था के तहत अस्थायी रूप से इस प्रणाली को शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए राज्य के चार केंद्रीय कारागारों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी, ताकि वहां अस्थायी ओपन जेल की व्यवस्था शुरू की जा सके।
सरकार के अनुसार, चारों केंद्रीय जेलों ने अपनी-अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इन रिपोर्टों के आधार पर तैयार हलफनामा हाई कोर्ट में दाखिल कर दिया गया है। अदालत ने सरकार की प्रगति रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर निर्धारित की है। अब इस दौरान सरकार से ओपन जेल परियोजना पर आगे की प्रगति और कार्यान्वयन की स्थिति पर विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी।
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