हजारीबाग , मई 28 -- झारखंड के हजारीबाग जिले में एक बार फिर अवैध कोयला कारोबार के तेजी से फैल रहा है।

बंद पड़ी खदानों और सीसीएल परियोजनाओं से बड़े पैमाने पर कोयले की चोरी, भंडारण और परिवहन का संगठित नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है। जंगल के रास्तों से कोयला गुप्त डिपो तक पहुंचाया जा रहा है, जहां से बड़े ट्रकों के जरिए बिहार, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में इसकी सप्लाई की जा रही है।

मानसून आने से पहले अवैध कारोबारी अधिक से अधिक कोयला स्टॉक करने में जुटे हैं। बारिश शुरू होने के बाद खनन और ढुलाई में दिक्कतें बढ़ जाती हैं, इसलिए अगले डेढ़ महीने को इस कारोबार के लिए सबसे अहम माना जा रहा है। इसी वजह से जिले के कई इलाकों में कोयले के भंडारण और आवाजाही बढ़ने की बात सामने आ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार हजारीबाग के सीमावर्ती और जंगल क्षेत्रों में अस्थायी गुप्त डिपो बनाए गए हैं, ताकि पुलिस, वन विभाग और सीसीएल सुरक्षा विभाग की नजरों से बचा जा सके। रात के अंधेरे में इन डिपो में कोयले का भंडारण किया जाता है। चुरचू, चरही और आंगो थाना क्षेत्रों में इस अवैध कारोबार के तेजी से फैलने की चर्चा है। हैरानी की बात यह है कि जिन इलाकों में फिलहाल कोई सक्रिय खदान नहीं है, वहां भी भारी मात्रा में कोयला डंप किए जाने की सूचना मिल रही है।

ग्रमीणों ने बताया कि सीसीएल के केदला, बसंतपुर, चुटूवा नाला और पेरज क्षेत्रों से चोरी किया गया कोयला पहले बाइक, साइकिल, ट्रैक्टर और छोटे वाहनों के जरिए जंगल रास्तों से करगी इलाके तक पहुंचाया जाता है। वहां से आगे चुरचू और आंगो के डिपो तक इसकी सप्लाई की जाती है। बताया जाता है कि रात के समय यह नेटवर्क सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। बाद में बड़े ट्रकों में कोयला लोड कर बिहार और उत्तर प्रदेश की मंडियों तक भेजा जाता है।

चरही और मांडू थाना सीमा से सटे बंद पड़े खदान क्षेत्रों में जेसीबी मशीन लगाकर अवैध खनन किए जाने की भी चर्चा है। फूलबगान, नोनिया बेड़ा और 44 नंबर खदान क्षेत्र में बोकारो नदी तक पाटकर कोयला निकाले जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे नदी और आसपास के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अवैध कोयले की सप्लाई सिर्फ बाहरी राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि रामगढ़ जिले की कुछ फैक्ट्रियों तक भी यह कोयला पहुंच रहा है। कम कीमत होने के कारण इसकी मांग लगातार बनी हुई है। वहीं बड़कागांव थाना क्षेत्र के सईदा, चपरी और जोराकाठ इलाके में भी बड़े पैमाने पर कोयले का स्टॉक किए जाने की चर्चा है। फिलहाल चरही साइडिंग से ढुलाई बंद है, लेकिन कारोबारी इस रूट को फिर से सक्रिय करने की कोशिश में लगे हैं।

पूरे मामले में अलग-अलग विभागों के अपने-अपने दावे हैं। सीसीएल सुरक्षा विभाग का कहना है कि सीमित संसाधनों के कारण कोयला चोरी रोकना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। वहीं स्थानीय पुलिस का दावा है कि क्षेत्र में लगातार गश्ती और छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार अवैध खनन और परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ खनन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सिस्टम की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर यह कारोबार संभव नहीं है।

लगातार बढ़ती गतिविधियों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर इस पूरे नेटवर्क को संरक्षण कौन दे रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह अवैध कारोबार और बड़े स्तर पर फैल सकता है। प्रशासन और संबंधित विभागों की चुप्पी से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो गई है।

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