रांची , जुलाई 31 -- झारखंड के चर्चित निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को हजारीबाग जमीन घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। इसके साथ ही एक वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद चौबे की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद जमानत मंजूर की। इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विनय कुमार चौबे को 20 मई 2025 को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने गिरफ्तार किया था। उन पर हजारीबाग के उपायुक्त (डीसी) के रूप में वर्ष 2009-10 के कार्यकाल के दौरान खासमहल, सेवायत और वनभूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री, फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन की प्रकृति बदलकर निजी लोगों के नाम हस्तांतरित कराने सहित कई गंभीर आरोप हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि चौबे बिना अदालत की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे, किसी भी गवाह को प्रभावित करने या उनसे संपर्क करने का प्रयास नहीं करेंगे तथा जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करेंगे।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि इस मामले के अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसी आधार पर विनय कुमार चौबे को भी समान राहत देने की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
एसीबी की जांच में इस मामले में कुल 73 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें विनय कुमार चौबे के अलावा विनय सिंह, स्निग्धा सिंह, विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) शैलेश कुमार और विजय सिंह सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
विनय कुमार चौबे के खिलाफ शराब घोटाला, आय से अधिक संपत्ति और अन्य मामलों की जांच भी चल रही है। हालांकि, उन मामलों में उन्हें पहले ही अदालतों से राहत मिल चुकी है।
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