भोपाल , जुलाई 21 -- मध्यप्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक, नारेबाजी और दो बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित कर दिया। कांग्रेस की ओर से विधेयक को प्रवर (सेलेक्ट) समिति के पास भेजने की मांग की गई, लेकिन सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस के विरोध और हंगामे के बीच विधेयक को पारित घोषित किया।
मानसून सत्र के दूसरे दिन सरकार ने यूसीसी विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत विधेयक की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, आतिफ अकील और बाला बच्चन ने भी विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि इस पर विस्तृत विचार-विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक एजेंडे के तहत विधेयक ला रही है तथा संविधान के अनुच्छेद-29 के तहत अल्पसंख्यकों को प्राप्त अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
विपक्ष की मांग अस्वीकार होने के बाद कांग्रेस विधायक अध्यक्ष की आसंदी के पास पहुंच गए और यूसीसी के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। इसके चलते विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पहले 10 मिनट और बाद में 15 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते रहे, जबकि सत्ता पक्ष विधेयक पर चर्चा आगे बढ़ाने की मांग करता रहा।
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यूसीसी सरकार का नहीं बल्कि जनता की राय का विधेयक है। उन्होंने बताया कि समिति को प्रदेशभर से लगभग 10 लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं और इन्हीं सुझावों के आधार पर विधेयक तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में भी समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं और मध्यप्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायक सीतासरन शर्मा, रामेश्वर शर्मा, संजय पाठक, घनश्याम चंद्रवंशी, भगवानदास सबनानी, दिलीप सिंह परिहार तथा अन्य सदस्यों ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे सामाजिक समानता, महिला सशक्तीकरण और राष्ट्रीय एकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर आदिवासी एवं हिंदू हितों का विरोध करने का आरोप लगाया, जबकि संजय पाठक ने कहा कि जातीय भेदभाव समाप्त होने से देश तेजी से आगे बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता महिला सशक्तीकरण, सामाजिक समरसता और समान अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 93 प्रतिशत नागरिकों ने यूसीसी का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी लागू होने के बाद प्रदेश में सभी विवाहों का पंजीयन अनिवार्य होगा तथा एक पति या पत्नी के रहते दूसरा विवाह वैध नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नागरिकों के धार्मिक और सामाजिक संस्कार पूर्ववत रहेंगे, लेकिन विवाह सहित नागरिक मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का सम्मान करती है तो उसे इस विधेयक का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्षों तक तुष्टीकरण की राजनीति करती रही है और अब उसका दोहरा चरित्र जनता के सामने आ चुका है।
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 1947 में भोपाल को पाकिस्तान से मिलाने की कोशिश की गई थी और ऐसे प्रयास करने वालों की मानसिकता लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत थी। उन्होंने यूसीसी को भेदभाव समाप्त करने वाला कानून बताते हुए कहा कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान कानूनी संरक्षण मिलेगा।
हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक लगातार "ओबीसी आरक्षण देना होगा", "चंदा चोरों गद्दी छोड़ो" और यूसीसी विरोधी नारे लगाते रहे। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से भी विधेयक के समर्थन में नारे लगाए गए। सदन में कई बार तीखी नोकझोंक की स्थिति बनी रही।
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