स्टॉकहोम , मई 22 -- रूस के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने कहा है कि नाटो देशों को यूक्रेन की मदद करनी चाहिए, ताकि वह अपने ड्रोन हमलों को और सटीक बना सके। उन्होंने नाटो देशों के हवाई क्षेत्र में यूक्रेनी ड्रोन की घुसपैठ के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है।
रूस की खुफिया एजेंसी एसवीआर का दावा है कि लातविया ने यूक्रेन को अपने क्षेत्र से रूस पर ड्रोन हमले करने की इजाजत दी है। लातविया के अधिकारियों ने हालांकि इस आरोप को खारिज कर दिया है। फिर अधिकारियों ने यूक्रेन से अपने ड्रोनों पर बेहतर नियंत्रण रखने और अधिक सटीक होने को कहा है।
नाटो के महासचिव मार्क रुटे के साथ बातचीत में स्वीडन के प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें रूस की बातों में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यूक्रेन कभी नहीं चाहेगा कि उसके ड्रोन मित्र देशों के इलाके में गिरें। कभी-कभी रूस द्वारा सिग्नलों को जैम करने या अन्य रुकावटों के कारण ऐसा होता है। नाटो महासचिव ने भी माना कि यूक्रेन सिर्फ रूस के हमले से अपनी रक्षा कर रहा है।
दरअसल, मार्च के मध्य से यूक्रेन के लंबी दूरी के ड्रोन रूस के तेल टर्मिनलों को निशाना बनाने के लिए बाल्टिक और नॉर्डिक देशों के हवाई क्षेत्र से गुजर रहे हैं। इस दौरान एस्टोनिया में एक ड्रोन पावर-प्लांट से टकरा गया था, जबकि हाल ही में एक ड्रोन को गिराने के लिए नाटो को लड़ाकू विमान भेजना पड़ा। लिथुआनिया, फिनलैंड और रोमानिया में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं।
लातविया में तो सात मई को एक तेल डिपो पर हुए ड्रोन हमले को न रोक पाने की वजह से वहां के रक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और प्रधानमंत्री एविका सिलिना की सरकार गिर गई। गुरुवार को भी एक नए ड्रोन अलर्ट के बाद नाटो के लड़ाकू विमानों को उड़ान भरनी पड़ी।
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