अम्बिकापुर , मार्च 14 -- छत्तीसगढ़ में अंबिकापुर के जिला कलेक्टर अजीत वसंत ने जिला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आज स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिले में संचालित स्वास्थ्य योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस दौरान जिले के स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सकों की उपलब्धता, चिकित्सकीय उपकरणों और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर विस्तृत चर्चा हुई।
जिला पीआरओ से आज मिली जानकारी के अनुसार,बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी. एस. मार्को सहित राष्ट्रीय कार्यक्रमों के नोडल अधिकारी, बीएमओ, डीपीएम, बीपीएम तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर वसंत ने विकासखंडवार समीक्षा करते हुए कहा कि विकासखंडों में लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बीएमओ की है। उन्होंने अधिकारियों को अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के पहुंचविहीन सुदूर क्षेत्रों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। विशेष रूप से पीवीटीजी बसाहटों में स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने पर जोर दिया गया।
बैठक में कलेक्टर ने चिरायु टीमों को नियमित रूप से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आयुष्मान भारत कार्ड के पंजीयन की प्रगति की जानकारी ली और सीएमएचओ को पंजीयन संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। शेष बचे आयुष्मान कार्डों को समय-सीमा के भीतर पूरा करने पर बल दिया गया।
कलेक्टर ने टीबी उन्मूलन के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने जांच, पॉजिटिव मरीजों की संख्या और निक्षय निरामय जांच एवं उपचार अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि मरीजों के उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी बीएमओ को अपने-अपने क्षेत्र के टीबी मरीजों की जानकारी संबंधित जनपद पंचायत सीईओ को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए, ताकि ग्राम पंचायतों के माध्यम से मरीजों को पोषण आहार सहायता प्रदान की जा सके।
बैठक में वेक्टर जनित रोगों के प्रभाव की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने नियमित जांच और पॉजिटिव मरीजों का पूर्ण इलाज सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने चिकित्सकों द्वारा मरीजों को निजी चिकित्सालयों में अनावश्यक रेफर किए जाने के मामलों पर संज्ञान लिया और चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति न बने, अन्यथा संबंधित के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। बैठक में आयुष विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों पर भी चर्चा हुई।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों और स्टाफ की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने एनएचएम के तहत रिक्त पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया की प्रगति भी जानी। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन संस्थानों के नवीन भवन बनकर तैयार हो गए हैं, वहां पदों की आवश्यकता की जानकारी शासन को उपलब्ध कराई जाए। स्वास्थ्य केंद्र भवनों की उपलब्धता के साथ ही उन्होंने लैब टेस्ट की सुविधाओं का जायजा लिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यकतानुसार चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध रहने चाहिए और सभी उपकरण चालू हालत में रहें, ताकि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। दवाइयों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई।
बैठक में कलेक्टर ने गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि एचआरपी (हाई रिस्क प्रेग्नेंसी) वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान के बाद उनकी लगातार मॉनिटरिंग की जाए और इसके लिए मितानिनों का सहयोग लिया जाए। शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लिए लोगों को प्रेरित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने पीएचसी और उप स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं की आवश्यक जांच के बाद ही, विशेष परिस्थितियों में जिला अस्पताल रेफर करने को कहा। अन्य मरीजों को भी अनावश्यक रूप से जिला अस्पताल रेफर न करने के सख्त निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि सुदूर और पहुंचविहीन क्षेत्रों में गृह प्रसव के मामलों को कम करना होगा। इसके लिए वहां विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषण आहार, गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, आवश्यक दवाइयां और टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य केंद्रों में रात के समय होने वाले प्रसव की जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा गया।
बैठक के दौरान विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई। आयुष्मान कार्ड, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, सिकल सेल अभियान, चिरायु कार्यक्रम, एनआरसी और एनक्यूएएस सर्टिफिकेशन सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली गई। कुष्ठ उन्मूलन, मलेरिया नियंत्रण, अंधत्व निवारण, तम्बाकू नियंत्रण, एनीमिया मुक्त भारत और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए संबंधित विकासखंडों को शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक सुलभ बनाने और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने का निर्देश दिया।
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