भोपाल , दिसंबर 16 -- मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर एनएसयूआई ने भाजपा सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि फर्जी अस्पतालों, फर्जी डॉक्टरों और कागजों पर दर्ज नर्सिंग स्टाफ के बढ़ते मामलों से घबराकर स्वास्थ्य विभाग ने अपने ऑनलाइन पोर्टल से अस्पतालों में रजिस्टर्ड डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की जानकारी ही हटा दी है।
रवि परमार ने आरोप लगाया कि प्रदेश में फर्जी अस्पतालों का जाल फैलता जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी न केवल ऐसे अस्पतालों को मान्यता दे रहे हैं, बल्कि आयुष्मान योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े को खुला संरक्षण भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई लंबे समय से फर्जी अस्पतालों और फर्जी पंजीकरण के खिलाफ आवाज उठाती आ रही है, लेकिन कार्रवाई के बजाय अधिकारियों द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पोर्टल से जानकारी हटने के बाद अब एक ही डॉक्टर या नर्स को फर्जी तरीके से आठ से दस अस्पतालों में रजिस्टर्ड दिखाया जा सकेगा और इसकी सार्वजनिक जांच या पुष्टि संभव नहीं रह जाएगी। यह फैसला सीधे तौर पर अस्पताल माफियाओं को फायदा पहुंचाने वाला है और मरीजों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने भी सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेकर फर्जी अस्पतालों की कूटरचित भौतिक निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जा रही हैं, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं और अस्पताल माफियाओं को खुला संरक्षण मिल रहा है।
अक्षय तोमर ने कहा कि प्रत्येक नागरिक और मरीज का यह मौलिक अधिकार है कि वह यह जान सके कि जिस अस्पताल में उसका इलाज हो रहा है, वहां कौन-कौन से डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ विधिवत रजिस्टर्ड हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी हटाकर पारदर्शिता को खत्म कर दिया है, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार फर्जी अस्पतालों को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
एनएसयूआई ने सरकार से मांग की है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर सभी अस्पतालों में रजिस्टर्ड डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की जानकारी तत्काल सार्वजनिक की जाए, एक डॉक्टर या नर्स के कई अस्पतालों में फर्जी पंजीयन की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, फर्जी अस्पतालों और कूटरचित निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने वाले अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज की जाए तथा फर्जी अस्पतालों की मान्यता तत्काल निरस्त की जाए।
रवि परमार ने चेतावनी दी कि यदि स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार ने शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो एनएसयूआई प्रदेशभर में जनआंदोलन और कानूनी लड़ाई छेड़ेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।
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