भोपाल , मई 11 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण विभाग प्रदेश की जनता की जान का दुश्मन बन गया है।

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने जारी बयान में कहा कि छिंदवाड़ा में जहरीले खांसी के सिरप के कारण 28 बच्चों की मौत के बाद भी कथित रूप से कमीशनखोरी के चलते उसी सिरप का वितरण जारी रखा गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि हाल में जबलपुर की प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में खांसी के सिरप समेत 10 दवाओं को अमानक पाया गया है, जबकि ये दवाएं पिछले एक वर्ष से प्रदेश के मरीजों को वितरित की जा रही थीं। इनमें दर्द निवारक, पैरासिटामोल, इंजेक्शन और अन्य दवाएं शामिल हैं।

माकपा नेता ने कहा कि भले ही अब इन दवाओं के वितरण पर रोक लगा दी गई हो, लेकिन लाखों मरीज इनका सेवन कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग समय रहते दवाओं की गुणवत्ता जांच कराने के बजाय जल्दबाजी में आपूर्ति और वितरण करता है, जिससे मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ होता है।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की बदहाल स्थिति का उदाहरण भिंड जिले की घटना है, जहां मदर्स डे के अवसर पर अस्पताल में बच्चों को दूध पिला रही महिलाओं पर छत का सीमेंट गिर गया, जिससे दो महिलाएं घायल हो गईं। माकपा ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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