रांची , फरवरी 25 -- झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष से राज्य के सभी सिविल सर्जनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।

बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ल के साथ विभाग के अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

बैठक के दौरान एनएचएम के अंतर्गत एसएनए स्पर्श की समीक्षा की गई। साथ ही पीएम-अभिम, 15वां वित्त आयोग एवं मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना की विस्तार से समीक्षा की गई। एनएचएम के अभियान निदेशक ने सिविल सर्जनों से पूछा कि एसएनए स्पर्श के अंतर्गत कितने बिल ट्रेजरी में भेजे गए, कितने पारित हुए तथा शेष बिल कब तक भेजे जाएंगे। इस पर अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी लंबित बिल 26 फरवरी तक अनिवार्य रूप से ट्रेजरी में भेज दिए जाएं। आवश्यकता पड़ने पर कैंप लगाकर कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

श्री सिंह ने सहियाओं को Rs.24,000 की दर से एकमुश्त राशि भेजे जाने की जानकारी देते हुए सभी जिलों को निर्देश दिया कि तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि अब सभी सिविल सर्जन विभाग के डीआईसी से ही अवकाश स्वीकृत कराएंगे, ताकि विभाग को सिविल सर्जन के अवकाश पर जाने की जानकारी रहे।

बैठक में आवंटन एवं व्यय की स्थिति पर विशेष जोर देते हुए कहा गया कि जितनी राशि आवंटित हुई है, उसके अनुरूप व्यय एवं ट्रेजरी में लंबित राशि का समुचित मिलान हो। हेल्थ सब सेंटरों के कार्यों तथा पुराने स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में परिवर्तित करने हेतु दिए गए फंड की भी समीक्षा की गई। 14 प्रकार की जांच के लिए मशीन एवं उपभोग्य सामग्रियों की खरीद की स्थिति की जानकारी ली गई।

अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज ने पीएम-अभिम, 15वें वित्त आयोग एवं मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के अंतर्गत उपलब्ध राशि, व्यय एवं शेष राशि की समीक्षा करते हुए लंबित विपत्रों के शीघ्र भुगतान का निर्देश दिया।

अपर मुख्य सचिव ने सभी सिविल सर्जनों को उपायुक्त के साथ बैठक कर व्यय की समीक्षा करने तथा लंबित मुद्दों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी उपचार योजना के तहत मरीजों को दिए जा रहे उपचार की स्थिति पर भी चर्चा की गई।

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