नयी दिल्ली , मार्च 26 -- देश का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र वार्षिक आधार पर लगभग नौ प्रतिशत की दर से मजबूत वृद्धि दर्ज हासिल कर रहा है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार 2024-25 में कुल स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम की राशि 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। मंत्रालय की गुरुवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह वृद्धि बढ़ती जागरूकता, स्वास्थ्य देखभाल वित्तपोषण तक बेहतर पहुंच और चिकित्सा खर्चों के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

पॉलिसीधारकों को समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने कैशलेस स्वास्थ्य बीमा दावों के प्रसंस्करण के लिए विशिष्ट समयसीमा निर्धारित की है।

आईआरडीएआई द्वारा कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन एक घंटे के भीतर और अंतिम स्वीकृति - तीन घंटे के भीतर किए जाने के निर्देश हैं। इन समय-सीमाओं का उद्देश्य देरी को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को समय पर चिकित्सा देखभाल मिल सके ।

आईआरडीएआई के 2024 के नियमों में यह निर्दिष्ट किया गया है कि बीमा उत्पादों का मूल्य निर्धारण सभी प्रासंगिक जोखिम कारकों के आधार पर उचित रूप से किया जाए और वे व्यवहार्य और मूल्य-संचालित बने रहें, साथ ही नियुक्त बीमांकिक द्वारा विश्वसनीय डेटा और ग्राहक प्रतिक्रिया का उपयोग करके आवधिक समीक्षा की जाए।

वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में दावों की संख्या के आधार पर निपटाना क्रमश: 85.66 प्रतिशत, 82.46 प्रतिशत और 87.50 प्रतिशत था।

विज्ञप्ति में आईआरडीएआई के बीमा भरोसा पोर्टल के हवाले से बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान सामान्य और स्वास्थ्य बीमा से संबंधित 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 1,27,755 (93 प्रतिशत) शिकायतों का निपटारा वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ही कर दिया गया।

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