पटना , जून 12 -- िहार को स्वास्थ्य नवाचार, मेडटेक उद्यमिता और अनुसंधान आधारित विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) बिहार राज्य परिषद् का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडलअखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान( एम्स) पटना एवं एम्स पटना इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल के दौरे पर पहुंचा। इस अवसर पर स्वास्थ्य नवाचार, स्टार्टअप विकास, ट्रांसलेशनल रिसर्च, कौशल विकास तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को सशक्त बनाने की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन प्रा. लि. के संयुक्त प्रबंध निदेशक प्रमोद शर्मा, रूबन पाटलिपुत्र अस्पताल के निदेशक डॉ. सत्यजीत कुमार सिंह, जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. रवि शंकर सिंह तथा अनुज डेयरी के प्रबंध निदेशक प्रिंस रंजन ने किया। उनके साथ सीआईआई बिहार राज्य परिषद् के अन्य वरिष्ठ सदस्य भी उपस्थित थे।
दौरे की शुरुआत एम्स पटना इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल से हुई जहां प्रतिनिधिमंडल को संस्थान की उपलब्धियों, नवाचार गतिविधियों, स्टार्टअप सहायता कार्यक्रमों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी गई। प्रतिनिधियों ने इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों और इग्निशन ग्रांट लाभार्थियों से संवाद किया तथा एम्स पटना में विकसित अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन एवं नवाचार अवसंरचना का अवलोकन किया।
इसके बाद एम्स पटना में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य संस्थानों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों, निवेशकों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई।
बैठक में एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रशांत कुमार सिंह सहित वरिष्ठ चिकित्सक, शोधकर्ता, नवप्रवर्तक और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ उपस्थित थे।
चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि एम्स पटना और सीआईआई बिहार के बीच सहयोग स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान को व्यवहारिक तकनीकों और जनोपयोगी उत्पादों में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह साझेदारी चिकित्सा प्रौद्योगिकी, डिजिटल हेल्थ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, स्टार्टअप मेंटरिंग, कौशल विकास तथा रोजगार सृजन को नई गति प्रदान करेगी।
सदस्यों ने कहा कि भारत आज विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है जहां 2.07 लाख से अधिक डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स 21.9 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर चुके हैं। हेल्थटेक क्षेत्र तेजी से उभरते हुए क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में एम्स पटना और सीआईआई जैसे संस्थानों के बीच सहयोग न केवल स्वास्थ्य नवाचार को बढ़ावा देगा बल्कि बिहार में निवेश, उद्यमिता और आर्थिक विकास के नए अवसर भी सृजित करेगा।
इस अवसर पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान केवल सहयोगात्मक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उद्योग, शिक्षण संस्थानों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच मजबूत साझेदारी से नवाचार को बढ़ावा मिलेगा तथा मरीजों को बेहतर, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
सीआईआई बिहार के प्रतिनिधियों ने एम्स पटना और एपीआईआईसी द्वारा विकसित किए जा रहे नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना करते हुए भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं, स्टार्टअप संवर्धन, निवेश प्रोत्साहन और कौशल विकास कार्यक्रमों पर मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बैठक में एपीआईआईसी की प्रधान अन्वेषक एवं ईएनटी विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. क्रांति भावना, सह-प्रधान अन्वेषक एवं ट्रॉमा एवं इमरजेंसी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार तथा एम्स पटना इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन काउंसिल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. मौसमी साहा के साथ साथ डॉ. अजीत कुमार, डॉ. भास्कर ठाकुरिया, डॉ. योगेश कुमार और डॉ. कमलेश झा भी मौजूद थे। बैठक का समापन बिहार को स्वास्थ्य नवाचार, मेडटेक उद्यमिता और ट्रांसलेशनल रिसर्च का अग्रणी केंद्र बनाने के साझा संकल्प के साथ हुआ।
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