बांसवाड़ा , मई 15 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने स्वास्थ्य को केवल किसी व्यक्ति का निजी विषय नहीं, अपितु समाज और राष्ट्र से जुड़ा विषय बताते हुए कहा है कि चिकित्सा सेवा को कभी भी केवल व्यवसायिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता।

श्री शेखावत शुक्रवार को बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ में एक मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में चिकित्सकों और वैद्यों को भगवान के समान दर्जा दिया गया है। जब कोई व्यक्ति बीमारी और पीड़ा से गुजरता है, तब उसे भगवान पर भरोसा रखने की सलाह दी जाती है और ऐसे समय में डॉक्टर ईश्वर के रूप में सामने आते हैं।

उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों में गंभीर बीमारी आने पर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। कई बार लोगों को मंगलसूत्र से लेकर जमीन-जायदाद तक बेचनी पड़ती है। श्री शेखावत ने कहा कि बांसवाड़ा और कुशलगढ़ जैसे आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों तक चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी रही, जिसके कारण लोगों को छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी उदयपुर, अहमदाबाद और गुजरात के अन्य शहरों का रुख करना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीबों की पीड़ा को समझते हुए आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की। यह दुनिया की सबसे बड़ी मेडिकल इंश्योरेंस योजना है, जिसके तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारक देशभर में पांच लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज करा सकते हैं। श्री शेखावत ने कहा कि केंद्र सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त पांच लाख रुपए तक की अलग स्वास्थ्य सुविधा भी शुरू की है, जिससे बुजुर्गों को दोहरी सहायता मिल रही है।

राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले राज्य में केवल जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर और उदयपुर में ही मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद हर लोकसभा क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में काम किया गया। उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार आने के बाद श्री मोदी ने लोकसभा में सिर्फ इसकी घोषणा ही नहीं की बल्कि इसे सुनिश्चित भी किया।

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