नयी दिल्ली , फरवरी 01 -- राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से रविवार को पेश केन्द्रीय बजट के मद्देनजर कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा को पूँजीपतियों के हाथ में सौंपने की तैयारी है और सरकार सरकारी विश्वविद्यालयों की जगह निजी विश्वविद्यालय खोलने की बात कर रही है।
राजद के सांसद सुधाकर सिंह ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि इस बजट में सबसे हास्यास्पद और खतरनाक बात तो यह है कि सरकार सरकारी विश्वविद्यालयों की जगह निजी विश्वविद्यालय खोलने की बात कर रही है जिससे शिक्षा अमीरों की बपौती बनेगी, गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के सपने महंगे हो जाएंगेउन्होंने इस बजट में बिहार के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुये कहा कि चुनाव खत्म हो चुका है। यह कोई संयोग नहीं है कि इस बजट में बिहार का नाम तक नहीं लिया गया। जब-जब चुनाव आते हैं, बिहार की याद आती है और जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, बिहार को भुला दिया जाता है। पांच लाख की आबादी वाले शहरों की बातें हो रही हैं लेकिन देश की रीढ़ कहे जाने वाले गाँवों के विकास पर एक शब्द नहीं। बिहार के ज्यादातर जिला मुख्यालय पांच लाख से कम आबादी वाले है | जिसके चलते बिहार को कोई फायदा नहीं है |श्री सिंह ने कहा कि बिहार के लोग आज भी ट्रेनों में लटककर यात्रा करने को मजबूर हैं। प्लेटफॉर्म पर भीड़, जनरल डिब्बों में जानलेवा हालात यह सब सच्चाई है। इसके बावजूद इस बजट में बिहार के लिए नई ट्रेनों, नए रूट या क्षमता विस्तार का कोई जिक्र नहीं। रेलवे को मुनाफे का साधन बना दिया गया है, सेवा का माध्यम नहीं।
उन्होंने कहा कि हर साल कहा जाता है कि कैंसर की दवाइयाँ सस्ती होंगी लेकिन ज़मीन पर सच्चाई यह है कि इलाज आज भी आम आदमी की पहुँच से बाहर है। बजट में फिर वही पुराने वादे दोहराए गए, लेकिन ठोस रोडमैप कहीं नहीं दिखा। बिहार में कोई कैंसर सुपरस्पेसिलिटी हॉस्पिटल नहीं होने से ईलाज के लिए मुंबई जाना होता है |राजद नेता ने कहा कि सरकार कहती है कि वह मेडिकल सेक्टर में निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करेगी। इसका सीधा मतलब है सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर कर स्वास्थ बीमा के जरिये बीमा कंपनियों एवं अस्पतालों के व्यवसाय को बढ़ावा देने का काम कर रही है। |बजट में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच रीजनल मेडिकल हब एवं तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने कि घोषणा कि गई जिसमें से भी बिहार को कुछ भी नहीं मिलने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बुद्ध सर्किट में बिहार का नाम नहीं है। केवल चुनावी राज्यों को ध्यान में रखकर पूर्वोत्तर में विकास की बातें की जा रही हैं। जिस सरकार ने नौ साल में दरभंगा में एम्स तक नहीं बनाया, वह अब यह संदेश दे रही है कि आगे जो कुछ भी होगा, वह सरकार नहीं बल्कि उसके पूँजीपति मित्र करेंगे। गरीब न सरकारी अस्पताल में इलाज करा पाएगा, न निजी अस्पताल का खर्च उठा पाएगा।
श्री सिंह ने कहा कि हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने की बात अच्छी लगती है, लेकिन सवाल यह है कि जो हॉस्टल पहले से चल रहे हैं, उनकी स्थिति क्या है? बिहार में भी गर्ल्स हॉस्टल नहीं बने। अगर हॉस्टल होते तो नीट छात्रा के साथ हुआ हादसा नहीं होता।
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