नागपुर , मार्च 20 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया भर में चल रहे संघर्षों की जड़ में स्वार्थ एवं वर्चस्व की भावना है तथा स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन के माध्यम से ही संभव है।

श्री भागवत ने आज यहां विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नए कार्यालय का शिलान्यास करने के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सदियों से दुनिया संघर्षों को सुलझाने का प्रयास कर रही है। लगभग 2,000 वर्षों से अलग-अलग विचारों का परीक्षण किया गया है, फिर भी तनाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता तथा हीनता की धारणाएं ऐसे मुद्दे हैं, जो निरंतर समाजों को प्रभावित करते रहते हैं।

उन्होंने भारत के दार्शनिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश का प्राचीन ज्ञान सभी प्राणियों की एकता और परस्पर जुड़ाव को प्रस्तुत करता है। उन्होंने संघर्ष-प्रेरित सोच से हटकर सद्भाव और सहयोग के पथ पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक विचार भी धीरे-धीरे इसी दृष्टिकोण को अपना रहे हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित