कोट्टायम , अगस्त 28 -- केरल पर्यटकों के एक समूह की नेपाल में स्वयंभूनाथ मंदिर में हुयी 20 मिनट की देरी जीवनदान साबित हुयी और वे अचानक आयी भीषण बाढ़ से बाल-बाल बच गये।

समूह में कोट्टायम के तिरुवंचूर कलाथिल हाउस के रहने वाले के. एम. सतीश कुमार ने कहा कि मंदिर में हुई अप्रत्याशित देरी बहुत अहम साबित हुई, क्योंकि बाद में यह समूह भारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच फंस गया था।

यह समूह 23 अगस्त को सुबह 10.45 बजे कोच्चि से निकला और गोरखपुर जाने से पहले मुंबई की यात्रा की। गोरखपुर से उन्होंने सड़क मार्ग से अपनी यात्रा जारी रखी और 24 अगस्त को काठमांडू पहुंचे।

समूह 26 अगस्त की सुबह मनकामना मंदिर के लिए निकला। सुबह करीब 7.30 बजे जब वे गल्जी बाज़ार पहुंचे, तो उन्होंने अचानक देखा कि लगभग 500 मीटर दूर बह रही त्रिशूली नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि नदी का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया और पानी किनारों से बाहर बहने लगा, जिससे पेड़ उखड़ गये और गाड़ियों तथा इमारतों के हिस्से बह गये। बाढ़ के पानी के कारण आगे की यात्रा असंभव हो गयी और समूह लगभग छह घंटे तक उस इलाके में फंसा रहा।

उन्होंने बताया कि जिस रास्ते से उन्हें जाना था, वहां पुल और सड़कें भी बाढ़ में नष्ट हो गये थे, जिससे पर्यटकों के पास कोई विकल्प नहीं बचा और उन्हें दूसरा रास्ता खोजना पड़ा।

सतीश कुमार ने बताया कि यात्रा के दौरान समूह ने स्वयंभूनाथ मंदिर का दौरा किया था और वहां लगभग 20 मिनट अतिरिक्त समय बिताया था। उन्होंने कहा कि मंदिर में हुई वह देरी आखिरकार उनकी जीवनदान साबित हुई।

उन्होंने कहा, "अगर हमने मंदिर में वे 20 मिनट नहीं बिताये होते, तो हमें किसी बड़ी आपदा का सामना करना पड़ सकता था।"उन्होंने बताया कि आगे की सड़कें बंद होने के कारण समूह को दूसरा रास्ता लेना पड़ा। उन्होंने जंगल के रास्तों और मुश्किल इलाकों से होते हुए लगभग छह घंटे तक यात्रा की और अगले दिन तड़के चितवन पहुंचे।

समूह रात करीब 12.30 बजे एक होटल पहुंचा, जहां कर्मचारियों ने उनके लिए खाने का इंतज़ाम किया। भूस्खलन के कारण हालांकि आगे का रास्ता बंद हो गया था, जिससे वे अपनी यात्रा जारी नहीं रख सके।

सतीश कुमार ने बताया कि इसलिए समूह ने रात चितवन में बितायी और अगली सुबह करीब नौ बजे अपनी यात्रा फिर से शुरू की।

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