नयी दिल्ली , मई 22 -- भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐसी किफायती तथा उच्च-प्रदर्शन वाली तापीय ऊर्जा भंडारण सामग्री विकसित की है जो केंद्रित सौर ऊर्जा (सीएसपी) संयंत्रों और औद्योगिक अपशिष्ट ऊष्मा पुनर्प्राप्ति प्रणालियों में उपयोग होने वाली थर्मल बैटरियों की क्षमता को काफी बढ़ा सकती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने आज बताया कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के स्वायत्त संस्थान इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई) के शोधकर्ताओं ने थर्मल ऊर्जा भंडारण अनुप्रयोगों के लिए स्पिनेल नैनो कम्पोजिट फेज चेंज मटेरियल (पीसीएम) विकसित करने की एक लागत प्रभावी और बड़े पैमाने पर अपनाई जा सकने वाली प्रक्रिया तैयार की है।

उन्होंने कहा कि शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि फेज चेंज मटेरियल में केवल एक प्रतिशत स्पिनेल ऑक्साइड नैनोकण मिलाने से उसकी विशिष्ट ताप क्षमता में करीब 45 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई। विशिष्ट ताप क्षमता किसी पदार्थ की ऊष्मीय ऊर्जा संग्रहित करने की क्षमता को दर्शाती है। नैनोकणों के बेहतर फैलाव से सामग्री की सतह ऊर्जा बढ़ती है और एक स्थिर स्पिनेल ऑक्साइड परत बनती है, जिससे ऊर्जा संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार इस नयी सामग्री की मदद से कम निर्माण सामग्री वाले छोटे और अधिक कुशल ऊर्जा भंडारण टैंक बनाए जा सकेंगे, जिससे पूंजीगत और परिचालन लागत दोनों में कमी आएगी। यह तकनीक अगली पीढ़ी की उच्च-प्रदर्शन वाली तापीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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