सहारनपुर , जून 5 -- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुरेश जैन ने आज कहा कि विकास को लेकर पश्चिम का आंख मींचकर अनुसरण करने और भारतीय परंपराओं और संस्कारों को तिलांजलि देने से पर्यावरण के समक्ष गहरा संकट पैदा हुआ है। जिसका समाधान अपने प्राचीन संस्कारों को अपनाने, सोच में परिवर्तन लाने और स्मार्ट सिटी के बजाए स्मार्ट विलेज की योजनाओं पर काम करने से होगा।
श्री जैन ने कहा कि पर्यावरण एक संस्कार है। पिछले 50-100 वर्षों में हमारे संस्कार ऐसी धूल में ढक गए कि गांव से लेकर महानगरों तक हमारे प्राचीन जलस्रोत सूख गए या मर गए। नहाने और पीने वाली नदियों का जल हाथ धोने लायक भी नहीं रह गया है। कार्यक्रम शुरू होने से पूर्व सुरेश जैन कुलपति प्रोफेसर विमला वाई, संयोजक पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने पौधा रोपण भी किया।
उन्होंने कहा कि अरावली पर्वत पर कभी 180 झीलें हुआ करती थीं जहां लाखों पक्षी मंडराया करते थे। अब वो सब खत्म हो गई हैं। चांदी के सिक्कों की बदौलत वहां होटल बन गए हैं। भारत विकास परिषद ने ड्रोन के जरिए नीम और दूसरे बहुउपयोगी पौधों के बीज डालकर वहां बड़े स्तर पर पौधा रोपण कराया।
जैन ने कहा कि हरियाणा में जब हम स्कूलों में पढ़ते थे तो यमुना नदी में स्नान करते थे और उसका पानी भी पीते थे। आज इसका पानी हाथ धोने लायक भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में बहुत विशाल झील हुआ करती थी उस झील को भरने नदी सूख गई है और नदी का रास्ता रोक दिया गया है जिससे अब वहां बाढ़ आती है। अब उस झील को भी पाटकर वहां कालोनियां खड़ी कर दी गईं। उन्होंने कहा कि देशभर में बड़े-बड़े हाइवे बनाए जा रहे हैं जिससे हरियाली कम हो रही है और व्यापक स्तर पर वृक्षों का कटान किया जा रहा है। पहले जीटी रोड़ के दोनों ओर लगातार छोटे-बड़े हरे-भरे पेड़ हुआ करते थे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण कोई अलग गतिविधि नहीं है बल्कि यह संस्कार है। पहले स्कूलों में साफ-सफाई का काम करते थे, वहां कर्मचारी नहीं हुआ करते थे। अब हम अपने यहां का कूड़ा पड़ौसी के किनारे फेंकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संवर्धन के लिए सकारात्मक सोच, कर्तव्यबोध की भावना का होना आवश्यक है। अच्छे संस्कारों के लिए चेतना अभियान चलाए जाने की जरूरत है। भारत विकास परिषद इस काम को बखूबी कर रहा है।
समारोह अध्यक्ष मां शाकुम्बरी यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रोफेसर विमला वाई ने सुरेश जैन द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि उर्वरकों का बेहिसाब इस्तेमाल रूकना चाहिए। प्रदूषण तभी फैलेगा जब हम संतुलन से ज्यादा पोषण करेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पर्यावरण संबंधी विषयों को लेकर बदलावों की शुरूआत खुद से करें।
उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ी के दौरान स्थितियां ज्यादा बिगड़ी हैं। पर्यावरण संवर्धन को लेकर वेद पुराणों ने हमें संतुलन बनाए रखने का ज्ञान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण और चेतना के लिए लोगों को आगे आने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सामने आए बगैर बेहतर पर्यावरण के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भूगर्भ जल और मिट्टी दोनों दूषित हो रहे हैं।
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