नयी दिल्ली , जुलाई 16 -- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने हैदराबाद स्थित केएन बायोसाइंसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को स्पिरुलिना से प्राकृतिक नीले रंगद्रव्य सी-फाइकोसायनिन के स्वदेशी उत्पादन की तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है।

डीएसटी की गुरुवार को जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार इस परियोजना का उद्देश्य खाद्य, पोषण, कृषि, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और जैव-उत्तेजक क्षेत्रों में उपयोग होने वाले इस प्राकृतिक रंगद्रव्य का घरेलू उत्पादन बढ़ाना तथा आयात पर निर्भरता कम करना है।

विभाग का यह भी कहना है कि यह तकनीक भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी ने स्वदेशी स्पिरुलिना स्ट्रेन का उपयोग कर विकसित की है और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) समझौते के तहत कंपनी को वाणिज्यिक उत्पादन के लिए सौंप दी गई है। इस परियोजना के तहत पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रिया से उच्च शुद्धता वाले सी-फाइकोसायनिन का उत्पादन किया जाएगा, जिससे रसायनों का कम उपयोग होगा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्राकृतिक उत्पाद तैयार किया जा सकेगा।

इस बीच प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड के सचिव राजेश कुमार पाठक ने बताया कि यह पहल स्वदेशी अनुसंधान को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इससे आयातित विशेष जैव उत्पादों पर निर्भरता कम होगी, हरित विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत की जैव-अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

कंपनी ने कहा कि टीडीबी के सहयोग से वाणिज्यिक उत्पादन सुविधाएं स्थापित करने और उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी सी-फाइकोसायनिन की घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी। इस परियोजना से प्राकृतिक रंजकों की स्वदेशी मूल्य श्रृंखला विकसित होने, जैव-विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने तथा भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने की भी उम्मीद है।

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