नयी दिल्ली , सितंबर 3 -- केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विद्युत वाहन विनिर्माताओं को गुरुवार को स्थानीय कल-पुर्जों के इस्तेमाल के नियमों के साथ खिलवाड़ करने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि हर इकाई की विनिर्माण सामग्री और उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला पर सरकार की निगाह है।
उन्होंने कहा कि उद्योग को कोई परेशानी है तो सरकार उसको दूर करने में उनकी मदद के लिए तैयार है पर कुछ एक कंपनियां,स्थानीयकरण के मामले में गड़बड़ी कर रही हैं वे उनकी निगाह में हैं। श्री गोयल यहां भारतीय वाहन विनिर्माताओं के संघ (सियाम) की 66वीं वार्षिक बैठक में मुख्य अतिथि थे।
श्री गोयल ने अपने संबोधन में कहा , " यह सोच बदल रही है कि भारत में बन रहे वाहन सिर्फ़ भारत के लिए बनते हैं, और भारत में डिज़ाइन किये गये इलेक्ट्रिक वाहन टेन और यूरोप में बनाए जा रहे हैं, जो वैश्विक भागीदारी की संभावना को दिखाते हैं।" उन्होंने कहा कि भागीदारी से पार्टनरशिप से ही मज़बूती आएगी।
वाणिज्य मंत्री ने कंपनियों से लोकलाइज़ेशन ( स्थानीय स्तर पर विनिर्माण) को और मज़बूत करने की अपील की। उन्होंने स्थानीयकरण के नाम पर गड़बड़ी करने वालों को आगाह करते हुए कहा , " सरकार इंडिजिनाइज़ेशन (स्थानीय) के असली स्तर का अंदाज़ा लगाने के लिए कंपनी-वार आयात -निर्यात के डेटा पर नज़र रख रही है।' उन्होंने कहा कि जो कंपनियाँ कुछ उत्पादोंको स्थानीय स्तर पर नहीं जुटा पा रही हैं उनको निर्यात बढ़ाकर आयात की भरपाई करना चाहिए।
श्री गोयल ने वाहन उद्योग को भरोसा दिलाया कि सरकार ज़रूरी चीज़ें बनाने और जहाँ भी ज़रूरत हो, मदद देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि कंपनियां भारत की दूसरे देशों साथ बढ़ती व्यापारिक भागीदारी , बढ़ते घरेलू बाजार और विनिर्माण क्षेत्र में वैश्विक बदलावों से पैदा हो रहे मौकों का फायदा उठायें। उन्होंने उनसे विनिर्माण प्रक्रिया में स्थानीयकरण को बढ़ाने, टेक्नोलॉजी, नवाचार, अनुसंधान और विकासमें निवेश करने , निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजार की सेवा के लिए खुद को तैयार करने की अपील की।
उन्होंने सियाम के सामने लक्ष्य रखा कि 2030 तक भारत में विकने वाला हर वाहन इलेक्ट्रिक वाहन होना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि वाहन उद्योग को आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि की गाड़ी का महत्वपूर्ण इंजनों में एक होगा। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ा और बढ़ता हुआ मध्यवर्ग, वैश्विक बाजार में भारत के लिये उभर रहे नये अवसर इस उद्योग के लिए वृद्धि के बड़े अवसर प्रदान करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को सिर्फ घरेलू बाजार की सेवा करके संतुष्ट नहीं होना चाहिए और कंपनियों से "वैश्विक सोचने" की अपील की। उन्होंने कहा कि कंपनियों को दुनिया भर के मार्केट की सेवा के लिए भारत में इकॉनमी ऑफ स्केल का इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्पादन की सुविधाएं विकसित देशों से बाहर निकल रही हैं क्यों कि वहां लागत सस्ती नहीं रही है, विनियामकीय बोझ बोझ ज्यादा है, युवाओं और प्रतिभाओं की कमी हो रही है, और औद्योगिकी की क्षमता घट गयी है। जो कंपनियाँ इन बदलावों का अंदाज़ा लगाती हैं, भविष्य के लिए योजना बनाती हैं और नये मौकों का फ़ायदा उठाती हैं, उन्हें फ़ायदा होगा, जबकि जो कंपनियाँ अपने मौजूदा कारोबार और बजार में आराम से रहना चाहती हैं, उनके पीछे छूट जाने का खतरा रहता है।
उन्होंने कंपनियों को अपने अंतराष्ट्रीय बाजार की तुलना में भारत के लिए कम क्वालिटी का माल बनाने के जोखिमों के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने उद्योग से यह पक्का करने की अपील की कि भारत में बने प्रोडक्ट वैश्विक मानकों को पूरा करें।
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