जयंत रॉय चौधरी सेकोलकाता , मई 27 -- पश्चिम बंगाल में वर्ष 2026 के बाद आर्थिक तरक्की की एक नयी कहानी लिखने की तैयारी शुरू हो गई है। इसका मुख्य जिम्मा सरकारी कंपनियों और विभागों को दिया गया है जिसके तहत राज्य में बंद पड़ी या धीमी पड़ी बड़ी योजनाओं को दोबारा चालू करने के लिए बंदरगाहों, इस्पात कारखानों और रेलवे के काम में तेजी लायी जा रही है।

केन्द्र और राज्य सरकार के बड़े अधिकारी इन योजनाओं को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। सरकार की कोशिश है कि पहले सरकारी स्तर पर बड़ा काम शुरू हो, ताकि इसे देखकर आगे चलकर निजी कंपनियां भी राज्य में निवेश करने के लिए आगे आएं।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विकास को रफ्तार देकर अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत करना इस समय सबसे जरूरी काम है। राज्य के दो बड़े सरकारी स्टील कारखाने, बर्नपुर का 'इस्को' और 'दुर्गापुर स्टील प्लांट', अब बड़े पैमाने पर अपने विस्तार की तैयारी में हैं। सरकारी कंपनी 'सेल' के अधिकारियों के अनुसार, बर्नपुर में स्टील बनाने की क्षमता को बढ़ाने के लिए ठेके देने का काम शुरू हो चुका है और साल 2029-30 तक यह काम पूरा हो जाएगा।

इसका अर्थ है कि आसनसोल के पास बर्नपुर शहर में करीब 45,000 करोड़ रुपये की लागत से काम शुरू होगा, जो इस सदी में पश्चिम बंगाल में होने वाला सबसे बड़ा निवेश है। यहाँ बनने वाले स्टील की वजह से आने वाले समय में गाड़ियां बनाने, मशीनें बनाने और जहाज बनाने वाले दूसरे छोटे-बड़े कारखाने भी खुलेंगे। इसी तरह, दुर्गापुर स्टील प्लांट की क्षमता को भी बढ़ाने और वहाँ 40 मेगावाट का बिजली घर लगाने की योजना है। इस विस्तार से आने वाले समय में करीब 20,000 नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

कोलकाता के खिदिरपुर और हल्दिया बंदरगाह का भी कायाकल्प किया जा रहा है। साल 2030 तक इनकी माल संभालने की क्षमता को बहुत ज्यादा बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। हल्दिया में मशीनों को इस तरह आधुनिक बनाया जा रहा है कि सामान उतारने-चढ़ाने का जो काम अभी डेढ़ से ढाई दिन में होता है, वह एक दिन से भी कम समय में संभव हो सकेगा। हल्दिया बंदरगाह केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए कोयला, तेल और भारी सामान पहुंचाने का एक बड़ा जरिया है, इसलिए इसे सुधारने से पूरे क्षेत्र के व्यापार को फायदा होगा। कोलकाता के ऐतिहासिक बास्कुल ब्रिज को भी ठीक किया जा रहा है।

इसके अलावा, पूर्वी मेदिनीपुर के ताजपुर में गहरे समुद्र का बंदरगाह बनाने की रुकी हुई योजना पर भी सरकार नए सिरे से विचार कर रही है। यह करीब 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रोजेक्ट है। इस बंदरगाह के बनने से समुद्र के बड़े-बड़े मालवाहक जहाज सीधे बंगाल आ सकेंगे, जिन्हें अभी दूसरे राज्यों के बंदरगाहों पर निर्भर रहना पड़ता है।

बंगाल में रेलवे के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए लगभग 93,000 करोड़ रुपये के परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिसमें से अकेले इस साल के लिए करीब 14,205 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की भीड़भाड़ को कम करना, उन जिलों को जोड़ना जहाँ अभी ट्रेनें कम हैं, और कोलकाता में मेट्रो के काम को तेजी से आगे बढ़ाना है। संतरागाछी-खड़गपुर के बीच चौथी रेल लाइन और सैंथिया-पाकुर के बीच तीसरी रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा है, जिससे यात्रियों और मालगाड़ियों दोनों को आने-जाने में आसानी होगी।

सीधे शब्दों में कहें तो स्टील, बंदरगाह और रेलवे की ये तमाम योजनाएं सिर्फ निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि यह बंगाल की पूरी आर्थिक स्थिति को बदलने और आने वाले लंबे समय के लिए विकास के रास्ते खोलने का एक बड़ा प्रयास हैं।

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