बेंगलुरु , अक्टूबर 20 -- केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को निशाना बनाकर किए गए कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर कर्नाटक सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पत्रकार राकेश शेट्टी और उसके सहयोगियों को बचा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया तो वह विजयादशमी के बाद फिर से सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

श्री कुमारस्वामी ने इस विवाद को एक सीधे राजनीतिक चुनौती में बदलते हुए श्री सिद्दारमैया की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, "श्री सिद्दारमैया, क्या आपके खिलाफ रची गई इस साजिश से आपका खून नहीं खौल रहा है?" उन्होंने शेट्टी और उनके साथियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने के बाद संवाददाताओं से कहा कि अगर पुलिस इन आरोपों पर कार्रवाई नहीं करती है, तो आंदोलन और तेज हो जाएगा।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा, "मैं इस मामले को यूं ही नहीं जाने दूंगा। भले ही श्री सिद्दारमैया इसे छोड़ना चाहें लेकिन मैं विजयादशमी के बाद फिर से आंदोलन शुरू करूंगा। जब तक इस स्टिंग ऑपरेशन के पीछे के लोग गिरफ्तार नहीं हो जाते, तब तक हम चुप नहीं बैठेंगे।" उन्होंने आरोप लगाया कि इस स्टिंग ऑपरेशन का मकसद श्री सिद्दारमैया की सार्वजनिक छवि को खराब करना और फुटेज का इस्तेमाल करके जबरन वसूली करना था। उन्होंने सवाल किया कि पूर्व मुख्यमंत्री, जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से कभी पीछे नहीं हटते, उन्होंने इस मामले पर इतनी कड़ाई से प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी?श्री कुमारास्वामी ने कहा, "श्री सिद्दारमैया ने कुछ भी गलत नहीं किया है, फिर भी उनकी छवि खराब करने और पैसे ऐंठने के लिए एक वीडियो बनाया गया है। यह सब देखकर क्या उनका खून नहीं खौल रहा है?"केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उनकी शिकायत में अवैध गतिविधियों, स्टिंग ऑपरेशन की आड़ में जबरन वसूली और राजनेताओं, पुलिसकर्मियों तथा सरकारी अधिकारियों को डराने-धमकाने और ब्लैकमेल करने की कोशिशों का विवरण दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले वे बेंगलुरु पुलिस आयुक्त से भी मिल चुके थे और अब उन्होंने यह मामला डीजीपी के समक्ष रखा है।

उन्होंने कहा कि आगे की कार्रवाई पुलिस की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायत दर्ज कराने का मतलब यह नहीं है कि यह अभियान यहीं खत्म हो गया है। श्री कुमारस्वामी ने इस विवाद को श्री सिद्दारमैया के साथ अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से अलग करने की कोशिश की और विधानसभा में उनके बीच अक्सर होने वाली नोकझोंक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के आधार पर उस मामले पर चुप नहीं रहा जा सकता, जिसे उन्होंने एक पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ रची गई साजिश बताया।

उन्होंने राज्य सरकार की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की कि वह स्टिंग ऑपरेशन करने के आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। उन्होंने सरकार की प्रतिक्रिया की गंभीरता पर सवाल उठाए और दावा किया कि कैबिनेट की एक बैठक में इस ऑपरेशन का जिक्र किया गया था।

उन्होंने पूछा, "क्या इससे ज्यादा शर्मनाक कुछ हो सकता है कि कैबिनेट की बैठक में खुद मुख्यमंत्री ही मंत्रियों को निशाना बनाने वाले स्टिंग ऑपरेशन के बारे में बात करें?"श्री कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि इस ऑपरेशन का मकसद मंत्रियों और विधायकों को दबाव में रखना था। उन्होंने सरकार पर इस साजिश के मास्टरमाइंड को बचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने गृह मंत्री की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए और पूछा कि अगर सरकार कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति ही नहीं दिखाती, तो पुलिस से क्या उम्मीद की जा सकती है?उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार चुपचाप बैठी है और स्टिंग ऑपरेशन करने के आरोपी व्यक्ति के जूते साफ कर रही है।" श्री कुमारस्वामी ने सरकार पर तंज कसते हुए सुझाव दिया कि एक नवंबर को 'कर्नाटक राज्योत्सव' के मौके पर स्टिंग ऑपरेशन करने वाले व्यक्ति को राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'कर्नाटक रत्न' से नवाजा जाना चाहिए।

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