चेन्नई , फरवरी 13 -- अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव और विपक्ष के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन सरकार की ओर से 'कलैग्नार महिला अधिकार निधि' योजना के तहत महिलाओं के बैंक खातों में 5,000 रुपये सीधे जमा करने के कदम पर तीखा हमला किया।
श्री पलानीस्वामी ने यहाँ जारी एक बयान में कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में हार के डर ने सरकार को ऐसा करने के लिए मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि 28 महीनों तक इस सरकार ने अपने वादे को लटकाये रखा और आज जब चुनाव करीब हैं, तो वे ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे अचानक उनके भीतर दया जाग गई हो।
श्री पलानीस्वामी ने घोषणा के समय पर सवाल उठाते हुए पूछा, "क्या तमिलनाडु ने 2024 और 2025 में गर्मी का सामना नहीं किया था? तब यह 'विशेष भत्ता' कहाँ था? चुनाव आने पर ही चिंता क्यों जागती है?"विपक्ष के नेता ने बताया कि 2021 में 'प्रत्येक राशन कार्ड' को सहायता प्रदान करने के बड़े-बड़े वादों के बावजूद, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) सरकार ने सत्ता में आने के बाद पात्रता सीमित कर दी, जिससे लगभग एक करोड़ महिलाएं इस लाभ से वंचित रह गईं। उन्होंने कहा, "उन्होंने हर महिला को वादा किया था, लेकिन दिया केवल कुछ को। यह कल्याण नहीं, विश्वासघात है।"श्री पलानीस्वामी ने वर्तमान शासन के तहत परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ पर कहा कि सरकार भले ही सितंबर 2023 से 34,000 रुपये देने का दावा कर रही हो, लेकिन साथ ही परिवारों को महंगाई, बढ़े हुए बिजली शुल्क, संपत्ति कर में वृद्धि और जीवन यापन की बढ़ती लागत के कारण भारी वित्तीय तनाव झेलना पड़ा है।
अन्नाद्रमुक नेता ने सवाल किया, "इस सरकार की नीतियों के कारण परिवारों ने जो पाया है, उससे कहीं अधिक खो दिया है। क्या लोगों की जेब खाली करने वाली सरकार अब चुनाव के समय खैरात बांटकर उन्हें फिर से भरने का ढोंग कर सकती है?"श्री पलानीस्वामी ने कहा कि यह अचानक उठाया गया कदम अन्नाद्रमुक के बढ़ते जन अभियान और उनके उस वादे के कारण लिया गया है, जिसमें उन्होंने सत्ता में आने पर प्रत्येक महिला मुखिया को 2,000 रुपये प्रति माह देने की प्रतिबद्धता जताई थी।
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