चेन्नई , मार्च 20 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने शुक्रवार को विपक्षी दल अन्नाद्रमुक की 'दिल्ली कूटनीति' पर तंज कसते हुए उस पर जोरदार हमला बोला।
श्री स्टालिन ने अन्नाद्रमुक के महासचिव के ई.के. पलानीस्वामी की बार-बार होने वाली दिल्ली यात्राओं पर सवाल उठाये। उन्होंने अमित शाह के साथ उनकी मुलाकातों के मकसद पर शक जताया और पूछा कि क्या यह 'दिल्ली खेमा' तमिलनाडु की जनता के लिए है या उनके अपने स्वार्थ के लिए? श्री स्टालिन ने कार्यकर्ताओं को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि अन्नाद्रमुक-भाजपा के गठबंधन के बड़े फैसले तमिलनाडु के बजाय दिल्ली में लिये जा रहे हैं।
श्री स्टालिन ने 23 अप्रैल के विधानसभा चुनाव को 'तमिलनाडु बनाम दिल्ली' बताया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के वोटर उन लोगों को स्वीकार नहीं करेंगे, जो हर बात के लिए केंद्र पर निर्भर हैं। बार-बार दिल्ली जाने से अन्नाद्रमुक की 'दिल्ली-केंद्रित' रणनीति उजागर होती है। श्री स्टालिन ने कहा कि जनता उन लोगों को सत्ता नहीं सौंपेगी, जिन्हें चुनाव लड़ने के लिए भी दिल्ली की मंजूरी चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या विपक्ष राज्य के फंड या एलपीजी की कमी जैसे मुद्दों के लिए दिल्ली जा रहा है? उन्होंने कहा कि जनता सच जानती है। विपक्ष का ध्यान जनता के कल्याण के बजाय दिल्ली से चलने वाले गठबंधन पर है।
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां भी बतायीं। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में द्रमुक सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। केंद्र सरकार का रवैया "तमिल-विरोधी और प्रतिशोधपूर्ण" रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने अपने अधिकारों और लोकतंत्र के लिए लड़ाई जारी रखी है। उन्होंने आगे कहा कि यह साफ दिख रहा है कि सभी फैसले दिल्ली में हो रहे हैं। उन्होंने अंत में सवाल पूछा कि आखिर विपक्ष के नेता और उनके साथी बार-बार दिल्ली क्यों जा रहे हैं?श्री स्टालिन ने आगे पूछा, "क्या वे तमिलनाडु के लिए फंड सुरक्षित करने, लंबित परियोजनाओं की मंजूरी लेने, राज्य के अधिकारों की रक्षा करने या रसोई गैस की कमी पर चर्चा करने दिल्ली जा रहे हैं? निश्चित रूप से नहीं।" अन्नाद्रमुक पर हमला तेज करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अन्नाद्रमुक-राजग गठबंधन ने निजी हितों के लिए अपनी पार्टी को गिरवी रख दिया है। उन्होंने कहा कि ये लोग तमिलनाडु को भी दिल्ली के पास गिरवी रखने में संकोच नहीं करेंगे।
श्री स्टालिन के अनुसार, विपक्ष तमिलनाडु में जो भी फैसला सुनाता है, वह असल में दिल्ली में लिया गया फैसला होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल द्रमुक के नेतृत्व वाला धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) ही राज्य की स्वायत्तता और प्रगतिशील 'द्रविड़ियन मॉडल' के लिए खड़ा है।
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