चेन्नई , मार्च 11 -- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच वहां फंसे तमिलों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से त्वरित कदम उठाने का आग्रह किया है।

प्रधानमंत्री को लिखे अर्ध-आधिकारिक पत्र में उन्होंने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया और ईरान क्षेत्र में जारी युद्ध की घटनाओं के कारण वहां फंसे लोगों और तमिलनाडु में उनके परिवारों के बीच भारी चिंता और बेचैनी का माहौल है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में तमिलनाडु के लोग अपनी आजीविका के लिए खाड़ी देशों में कार्यरत हैं। अनुमान है कि इन देशों में लगभग 19 लाख तमिल निवास कर रहे हैं।

श्री स्टालिन ने कहा, "मैं यह पत्र पश्चिम एशिया और ईरान क्षेत्र में जारी युद्ध के कारण वहां के विभिन्न हिस्सों में फंसे तमिलनाडु के लोगों की सुरक्षा और निकासी के लिए आपके तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करने के लिए लिख रहा हूं।"उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों की चिंताओं को दूर करने के लिए तमिलनाडु सरकार ने चेन्नई तथा नयी दिल्ली स्थित तमिलनाडु भवन में चौबीसों घंटे सहायता केंद्र स्थापित किए हैं। अब तक लगभग 2600 आपात कॉल प्राप्त हुई हैं, जिनमें से अधिकांश लोगों ने भारत वापसी के लिए सहायता और प्रभावित क्षेत्रों से उड़ानों की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी है।

इन कॉलों के आधार पर सत्यापन के बाद लगभग एक हजार फंसे तमिलों का विवरण तैयार कर विदेश मंत्रालय और क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावासों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों के कारण क्षेत्र के कुछ स्थानों, जैसे बहरीन और कुवैत से उड़ान संचालन बाधित हो गयी है। इसके कारण कई लोगों को सड़क मार्ग से पड़ोसी देशों, जैसे सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों तक पहुंचना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी भारत वापसी के लिए पारगमन वीजा एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है और केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि ऐसे फंसे लोगों को संचालित हवाई अड्डों तक सुरक्षित पहुंचने और शीघ्र भारत लौटने के लिए आवश्यक पारगमन अनुमति और वीजा की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने बताया कि अब तक कुल 16 उड़ानों के माध्यम से 5256 फंसे यात्री तमिलनाडु पहुंच चुके हैं। उन्होंने बड़ी संख्या में लोगों की निकासी को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय से चेन्नई के लिए अतिरिक्त विशेष उड़ानों की व्यवस्था करने का भी आग्रह किया।

श्री स्टालिन ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि तमिलनाडु के कन्याकुमारी और तूतीकोरिन जिलों के लगभग 593 मछुआरे ईरान के द्वीपों में मत्स्य उद्योग में कार्यरत हैं और वहां फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन मछुआरों के परिवार राज्य सरकार से उनकी सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे आवश्यक कदम उठाकर उनकी सुरक्षा और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।

उन्होंने संबंधित मंत्रालयों और एजेंसियों को निर्देश देकर पश्चिम एशिया क्षेत्र में फंसे तमिलों को तत्काल सहायता, सुरक्षित निकासी और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस अप्रत्याशित वैश्विक संकट से निपटने के लिए उनकी सरकार केंद्र सरकार को हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।

इस बीच, श्री स्टालिन ने पश्चिम एशिया क्षेत्र में युद्ध की स्थिति के कारण तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति शृंखला बाधित होने के मद्देनजर श्री मोदी से घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान और अन्य देशों के बीच जारी संघर्ष के कारण भारत को पश्चिम एशिया से होने वाली गैस आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है और भारत की इस क्षेत्र पर अधिक निर्भरता के कारण स्थिति और जटिल हो गयी है। श्री स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में घरेलू गैस की मांग लगभग 200 मीट्रिक टन प्रति माह है, जबकि वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों की मांग लगभग 20 मीट्रिक टन प्रति माह है।

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