टिहरी , मई, 20 -- उत्तराखंड के टिहरी जनपद में स्टाम्प शुल्क अपवंचना के मामलों पर बुधवार को अपर जिलाधिकारी न्यायालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार मामलों का निस्तारण किया है।
अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र सिंह नेगी की अदालत में सुनवाई के दौरान संपत्तियों के वास्तविक स्वरूप और विवरण छुपाकर स्टाम्प शुल्क की चोरी किए जाने के तथ्य सामने आए। न्यायालय ने सभी मामलों में कमी स्टाम्प शुल्क के साथ अर्थदण्ड और 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से जुर्माना लगाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राज्य बनाम विनोद रावत निवासी दलख्यारी, कीर्तिनगर के मामले में बगवान क्षेत्र स्थित चार मंजिला होम स्टे भवन का वास्तविक क्षेत्रफल कम दर्शाया गया था। जांच में मामला सही पाए जाने पर न्यायालय ने 10,65,533 रुपये का जुर्माना लगाया।
वहीं, राज्य बनाम जितेन्द्र सिंह पंवार निवासी ऋषिकेश के मामले में तपोवन स्थित संपत्ति को पंजीकरण के समय आवासीय बताया गया, जबकि जांच में वह व्यवसायिक निकली। इस प्रकरण में न्यायालय ने 34,94,910 रुपये का जुर्माना लगाया।
इसी क्रम में राज्य बनाम मंजुल अग्रवाल निवासी लखनऊ के मामले में टिहरी तहसील स्थित संपत्ति की सड़क से दूरी गलत दर्शाकर स्टाम्प शुल्क की अपवंचना की गई। मामले में 1,19,050 का जुर्माना लगाया।
चौथे मामले में राज्य बनाम नितिन अग्रवाल निवासी लखनऊ द्वारा सौड मय आलूचक क्षेत्र की संपत्ति को आवासीय दर्शाया गया, जबकि जांच में वह व्यवसायिक पाई गई। इस मामले में न्यायालय ने 25,28,143 रुपये का जुर्माना लगाया।
अपर जिलाधिकारी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि राजस्व हितों की रक्षा के लिए स्टाम्प शुल्क अपवंचना के मामलों में आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
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