भोपाल , सितंबर 09 -- मध्यप्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। भोपाल में बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर कमला पार्क क्षेत्र में सड़क पर धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के चलते हमीदिया अस्पताल सहित प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) और वैकल्पिक ऑपरेशन सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि आपातकालीन और आईसीयू सेवाएं जारी हैं।
हमीदिया अस्पताल में बुधवार को ओपीडी सुबह नौ बजे से करीब एक घंटे बंद रही। मरीजों की भीड़ को देखते हुए सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी खोली गई, जहां वरिष्ठ चिकित्सकों ने मरीजों को देखा। इसके बाद भी मरीजों की मौजूदगी रही। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार करीब 500 मरीज ओपीडी पहुंचे, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या करीब तीन हजार रहती है। आंदोलन के कारण मरीजों को उपचार के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
हमीदिया में नियमित रूप से होने वाले वैकल्पिक ऑपरेशन भी प्रभावित हुए। दोपहर 12 बजे तक दो आपातकालीन ऑपरेशन हुए, जबकि सामान्य दिनों में करीब 40 वैकल्पिक ऑपरेशन होते हैं। आंदोलन के कारण वैकल्पिक ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। अस्पताल की प्रयोगशाला में भी सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या कम रही।
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह सिद्धू ने बताया कि आंदोलन में करीब 600 जूनियर रेजिडेंट और 250 इंटर्न डॉक्टर शामिल हैं। डॉक्टर केवल ओपीडी और वैकल्पिक ऑपरेशन का बहिष्कार कर रहे हैं, जबकि आपातकालीन और आईसीयू सेवाएं अन्य चिकित्सकों द्वारा संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में देशभर में समान स्टाइपेंड लागू करना, प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तथा घायल डॉक्टरों को उचित मुआवजा देना शामिल है। उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने की मांग भी रखी है।
भोपाल में कमला पार्क के पास सड़क पर धरना दिए जाने से यातायात प्रभावित है और मार्ग को वन-वे किया गया है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। धूप से बचने के लिए डॉक्टर सड़क किनारे पेड़ों की छांव और अन्य स्थानों पर गद्दे लगाकर धरना दे रहे हैं।
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि सरकार के साथ हुई बैठक के बावजूद मांगों के समाधान के संबंध में अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य मंत्री समय रहते उनसे बातचीत करते तो सड़क पर आंदोलन करने की स्थिति नहीं बनती।
प्रदेश के इंदौर सहित अन्य शहरों में भी इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। डॉक्टरों का कहना है कि आगे की रणनीति प्रदेशभर के चिकित्सकों से चर्चा के बाद सामूहिक सहमति से तय की जाएगी।
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