नैनीताल , अक्टूबर 07 -- उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सेल सर्टिफिकेट पर वसूले गए अतिरिक्त स्टांप शुल्क की वापसी संबंधी वर्ष 2015 के आदेश का अनुपालन न होने के मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है।
अदालत ने प्रमुख सचिव (वन) आर.के. सुधांशु को अनुपालन के लिए 30 दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है। अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। उस दिन प्रमुख सचिव को पुनः व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मैसर्स एन.यू. टेक वार्निश उद्योग की अवमानना याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान प्रमुख सचिव वन अदालत में पेश हुए। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वर्ष 2015 में उच्च न्यायालय ने सेल सर्टिफिकेट पर दो प्रतिशत से अधिक वसूले गए स्टाम्प शुल्क को आठ सप्ताह में याचिकाकर्ता को वापस करने के निर्देश दिए थे लेकिन आज तक आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है।
अदालत ने कहा कि सभी मंचों पर मुकदमा हारने के बावजूद आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। प्रमुख सचिव ने कहा कि विभाग आदेश को लेकर गंभीर है, पर इसमें काफी प्रक्रियात्मक और वित्तीय स्वीकृतियां लगती हैं, इसलिए 100 दिन का समय दिया जाए। अदालत ने मांग को अस्वीकार करते हुए आदेश के अनुपालन के लिए सिर्फ 30 दिन की मोहलत दी।
अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच न्याय का संतुलन बनाना है, इसलिए अवमानना मामले में इतना समय नहीं दिया जा सकता। अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को मुख्य वन संरक्षक को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं।
मामले के अनुसार राज्य ने सेल सर्टिफिकेट पर आठ प्रतिशत स्टांप शुल्क वसूलने का फैसला किया था। इसको याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। जो 13 अप्रैल 2004 को स्वीकार हुई। राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय गई। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि केवल दो प्रतिशत शुल्क वसूला जा सकता है। याचिकाकर्ता ने आठ प्रतिशत शुल्क जमा किया था।
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